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हाईकोर्ट ने पत्नी को 24 हजार मासिक भरण-पोषण देने के फैमिली कोर्ट का आदेश रखा बरकरार

Ranchi: हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच चल रहे भरण-पोषण विवाद में फैमिली कोर्ट रांची द्वारा पत्नी को दिए गए 24 हजार रुपए प्रति माह के भरण-पोषण आदेश को सही ठहराया है. कोर्ट ने पत्नी की भरण-पोषण राशि बढ़ोतरी की मांग और पति की फैमिली कोर्ट के आदेश रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया. मामले में पति और पत्नी दोनों की ओर से अलग-अलग क्रिमिनल रिवीजन दायर की गई थी. मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने की. 

 

दरअसल पत्नी चेतना कुमार ने अदालत में कहा कि उनके पति डॉ. प्रसून कुमार पटना के प्रसिद्ध न्यूरो फिजिशियन हैं और उनकी मासिक आय करीब 3 लाख से अधिक है. उन्होंने भरण-पोषण राशि को बढ़ाकर 60 हजार प्रति माह करने की मांग की थी. 


वहीं पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द करने की अपील की थी. पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि वह पहले ही काफी रकम दे चुके हैं और तलाक के फैसले में पत्नी के लिए 20 लाख स्थायी गुजारा भत्ता भी जमा कर चुके हैं.

 

पत्नी को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है

 

हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 125 CrPC का उद्देश्य महिलाओं को बेसहारा होने से बचाना है. पत्नी को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है. पति अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए बहाने नहीं बना सकता. कोर्ट ने माना कि पत्नी के पास कोई आय का स्रोत नहीं है और फैमिली कोर्ट ने सभी तथ्यों को देखते हुए उचित आदेश दिया है.

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