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संरक्षित/आरक्षित वन से 1 KM बाहर स्टोन क्रशर लगाने वाले PIL पर हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश बरकरार

  • मामले में हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलील पूरी हो गई.
  • कोर्ट ने दोनों पक्षों को 13 अप्रैल तक संक्षिप्त लिखित बहस प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.

Ranchi: हाईकोर्ट में स्टोन क्रशर और पर्यावरण से जुड़े मामले पर दाखिल आनंद कुमार की जनहित याचिका की सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलील पूरी हो गई. कोर्ट ने दोनों पक्षों को 13 अप्रैल तक संक्षिप्त लिखित बहस प्रस्तुत करने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने 16 नवंबर 2025 को दिए गए अंतरिम आदेश ( झारखंड में संरक्षित या आरक्षित वन की सीमा से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्टोन क्रशर लगाने पर रोक) बरकरार रखा है. 


सुनवाई के दौरान प्रार्थी आनंद कुमार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार ने 4800 क्रशर यूनिट होने की बात बताई है. संरक्षित या आरक्षित वन की सीमा से 250 मीटर की दूरी पर स्टोन क्रशर लगाने संबंधी सरकार के नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए. पूर्व की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने यह भी पाया था कि सरकार के रिकॉर्ड में ऐसा कोई शपथपत्र या सामग्री उपलब्ध नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि संरक्षित या आरक्षित वन की सीमा से 500 मीटर की दूरी पर स्टोन क्रशर लगाने की पाबंदी को 2015 और 2017 की अधिसूचनाओं के जरिए घटाकर 250 मीटर क्यों किया गया. 


दरअसल याचिकाकर्ता आनंद कुमार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि संरक्षित या आरक्षित वन की सीमा से 1 किलोमीटर की परिधि के भीतर स्टोन क्रेशर मशीन और माइनिंग गतिविधि प्रतिबंधित किया है. लेकिन झारखंड सरकार ने वर्ष 2015 में नोटिफिकेशन जारी कर इसे घटाकर घटकर 250 मीटर कर दिया. अब सरकार ने इस दायरे को और कम कर 7.5 मीटर कर दिया है. 


प्रार्थी ने सरकार के वर्ष 2015 के नोटिफिकेशन जारी करने वाले संबंधित अधिकारियों जिनके चलते अवैध रूप से माइनिंग हुई है, उनकी संपत्ति की जांच सेंट्रल विजिलेंस कमिशन, सीबीआई या ईडी से कराकर उनकी संपत्ति जब्त कराने का आग्रह किया है.

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