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हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति 2016 : JSSC को सर्टिफाइड कॉपी कोर्ट में पेश करने की हाईकोर्ट ने दी छूट

Ranchi: हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति 2016 से जुड़े मामले में एकल पीठ के 1 सितंबर 2025 के आदेश को चुनौती देने वाली झारखंड स्टाफ सलेक्शन कमीशन (जेएसएससी) की अपील पर आज सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जेएसएससी की ओर से हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी कोर्ट को उपलब्ध कराने की छूट देने का आग्रह संबंधी हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई की.
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Ranchi: हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति 2016 से जुड़े मामले में एकल पीठ के 1 सितंबर 2025 के आदेश को चुनौती देने वाली झारखंड स्टाफ सलेक्शन कमीशन (जेएसएससी) की अपील पर आज सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जेएसएससी की ओर से हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी कोर्ट को उपलब्ध कराने की छूट देने का आग्रह संबंधी हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई की. 


खंडपीठ ने जेएसएससी को सर्टिफाइड कॉपी कोर्ट में प्रस्तुत करने की छूट प्रदान की. साथ ही मामले में बची हुई त्रुटि को चार सप्ताह में हटाने का निर्देश जेएसएससी को दिया है. खंडपीठ ने कहा कि अगर जेएसएससी की ओर से नीयत समय में त्रुटि नहीं हटाई जाती है तो यह याचिका स्वत: खारिज मानी जाएगी. जेएसएससी ने मीना कुमारी के एकल पीठ के आदेश को अपील दायर कर चुनौती दी है.  जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष रखा. वहीं सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा. 

 

बता दें कि मीना कुमारी के मामले में हाईकोर्ट में अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने कैविएट फाइल किया है और कहा है कि कोई भी निर्णय के पूर्व उनका पक्ष सुना जाए. 

 

क्या था एकल पीठ का आदेश

 

 मीना कुमारी के मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि नियुक्ति प्रक्रिया में उठे विवादों की जांच के लिए वन मैन कमीशन का गठन किया जाए. यह कमीशन पूरे मामले की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करेगा.


अदालत ने कहा था कि शिक्षक नियुक्ति से संबंधित लंबित मामलों और अभ्यर्थियों की शिकायतों के समाधान के लिए ठोस व्यवस्था की आवश्यकता है. इसके तहत संबंधित चयन आयोग को एक स्पेशल काउंटर बनाने का निर्देश दिया गया था, ताकि अभ्यर्थियों को आवश्यक जानकारी और दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराए जा सकें. 


सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मेरिट लिस्ट और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए. यदि किसी अभ्यर्थी को आपत्ति है तो उसे अपनी शिकायत दर्ज कराने और जानकारी प्राप्त करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए था.

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