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ILS मामला : उच्च शिक्षा सचिव ने हाईकोर्ट को बताया-3 माह में स्वपोषित संस्थाओं को लेकर बनेगा  कानून

रांची यूनिवर्सिटी के अधीन चल रहे लॉ कॉलेज इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (आईएलएस) में एकेडमिक फैसिलिटी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर दायर याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट के आदेश के आलोक में उच्च शिक्षा के प्रधान सचिव, वित्त विभाग के प्रधान सचिव, जेपीएससी के सचिव, रांची यूनिवर्सिटी के वीसी और आईएलएस के डीन व डायरेक्टर हाजिर हुए.
 
  • उच्च शिक्षा के प्रधान सचिव, वित्त विभाग के प्रधान सचिव, जेपीएससी के सचिव, रांची यूनिवर्सिटी के वीसी, आईएलएस के डीन व डायरेक्टर हुए हाजिर
  • आईएलएस में विद्यार्थियों का अगले सत्र से नामांकन पर रोक जारी

Ranchi :   रांची यूनिवर्सिटी के अधीन चल रहे लॉ कॉलेज इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (आईएलएस) में एकेडमिक फैसिलिटी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर दायर याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट के आदेश के आलोक में उच्च शिक्षा के प्रधान सचिव, वित्त विभाग के प्रधान सचिव, जेपीएससी के सचिव, रांची यूनिवर्सिटी के वीसी और आईएलएस के डीन व डायरेक्टर हाजिर हुए.

 

मामले में उच्च शिक्षा सचिव ने कोर्ट को बताया कि सरकार एक कानून पर काम कर रही है, जो लगभग तीन माह में तैयार हो जाएगी, जिसमें झारखंड के स्व वित्त पोषित संस्थाओं को एक सोसाइटी के तहत लाया जाएगा. उनको स्वायत संस्थान बनाया जाएगा एक कमेटी बनेगी, जिसमें संबंधित विश्वविद्यालय के बीसी और सरकार के प्रतिनिधि रहेंगे. 

 

 

यह कमेटी संस्थान में कितने फैकल्टी की आवश्यकता है, इसका स्वयं निर्धारण करेगी और उनकी सैलरी और नियुक्ति भी करेगी. इसमें सरकार और जेपीएससी का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा. कोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय से पूछा कि आईएलएस में कितने स्थाई असिस्टेंट प्रोफेसर की आवश्यकता है.

 

इस पर कोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है. कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को भी निर्देश दिया है कि वह आईएलएस का निरीक्षण कर देखे कि वहां कितने फैकल्टी की आवश्यकता है.  बीसीआई से भी जवाब मांगा गया है.

 

कोर्ट  ने कहा कि आईएलएस में प्रोफेसर की नियुक्ति अनुबंध के आधार पर ना की जाए. प्रोफेसर को यूजीसी पे स्केल के तहत ही भुगतान हो. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 मई निर्धारित की है. 

 

कोर्ट ने संस्थान में अगले सत्र से विद्यार्थियों के नामांकन पर लगी रोक जारी रखी है. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अनुज बर्मन एवं अधिवक्ता अनूप कुमार अग्रवाल ने पक्ष रखा. मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंद सेन की कोर्ट में हुई. 
 

 

कोर्ट ने आईएलएस में प्रोफेसर की नियमित नियुक्ति नहीं होने पर सवाल उठाया. साथ ही आईएलएस में एकेडमिक फैसिलिटी बेहतर करने के लिए नियमित नियुक्ति का रास्ता निकालने को कहा. 
 

 

दरअसल, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम के तहत इनके पास लाइब्रेरी, क्वालिफाइड प्रिंसिपल, कोर फैसिलिटी की कमी थी. जिसको लेकर हाईकोर्ट में अंबेश कुमार चौबे की ओर से याचिका दाखिल की गई थी.

 

उनका कहना था कि की इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज की लापरवाही के कारण 418 विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने संस्थान को मेल के माध्यम से अक्टूबर 2025 में 6 माह में इन कमियों को दूर करने को कहा था. लेकिन इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज ने इसे दूर नहीं किया. यह संस्थान सरकार के निर्देश के तहत स्व वित्तपोषि संस्थान है.

 

 

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