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हिमांशु सिंह आज हमारे बीच नहीं हैं, पुलिस के सामने हुई हत्या से वर्दी पर लगे दाग कैसे धुलेंगे?

Ranchi : जमशेदपुर के करणी सेना युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष हिमांशु सिंह आज हमारे बीच नहीं रहे. उनके एक साथी भी गंभीर रूप से घायल हैं और जिंदगी-मौत से जूझ रहे हैं. आरोप है कि कुछ अज्ञात लोगों ने पीसीआर वैन और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हिमांशु सिंह और उनके साथी पर चाकू से हमला किया, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रही.

 

हमले में गंभीर रूप से घायल हिमांशु सिंह को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सोमवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. यदि समय पर उन्हें बचाने का प्रयास किया जाता, तो शायद आज हिमांशु सिंह हमारे बीच होते.अब सवाल यह है कि पुलिस की आंखों के सामने किसी युवक की इस तरह हत्या हो जाना क्या पुलिस की जवाबदेही नहीं बनती? अक्सर किसी भी अवैध सामान उनके नज़रों के सामने परिवहन तुरंत पीछा करने कथित उगाही से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे हैं, लेकिन यहां तीन-चार पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में एक युवक पर लगातार चाकू से हमला होता रहा.

 

यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला है. यदि पुलिस जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती, तो संभव है कि स्थिति अलग होती. घटना या दुर्घटना को पूरी तरह रोक पाना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन यदि पुलिस की मौजूदगी में ही किसी की हत्या हो जाए, तो आम लोगों का सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है.झारखंड पुलिस का स्लोगन सेवा ही लक्ष्य है. लेकिन जब पुलिस की मौजूदगी में किसी युवक की सरेआम हत्या हो जाती है, तो यह स्लोगन खुद सवालों के घेरे में आ जाता है.

 

यदि अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है, अवैध गतिविधियां लगातार जारी हैं और कानून-व्यवस्था पर बार-बार सवाल उठ रहे हैं, तो जनता स्वाभाविक रूप से पूछेगी कि "सेवा ही लक्ष्य" का वास्तविक अर्थ क्या है?हालांकि, इस मामले में जमशेदपुर के एसएसपी पीयूष पांडे ने ड्यूटी पर मौजूद तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. लेकिन क्या केवल निलंबन से पुलिस की उस छवि पर लगे दाग मिट पाएंगे, जिस पर अब जनता सवाल उठा रही है?

 

जानकारी के अनुसार, बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार में कुछ युवकों द्वारा युवतियों से कथित छेड़छाड़ का विरोध हिमांशु सिंह और उनके साथियों ने किया था. इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हुई. स्थिति बिगड़ने पर बाउंसरों ने सभी को बार से बाहर निकाल दिया. आरोप है कि बाहर निकलने के बाद कुछ युवकों ने हिमांशु सिंह का पीछा किया. वे पीसीआर वाहन के पास पहुंच गए, लेकिन वहीं उन पर चाकू से कई वार किए गए.

 

आरोप है कि उस समय पुलिस वाहन में पुलिसकर्मी मौजूद थे, जबकि एक पुलिसकर्मी बाहर खड़ा था. इसके बावजूद हमलावर वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए.कुछ दिन पहले एक सरकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मंच से पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा था कि वर्दी केवल अधिकार नहीं, बल्कि जनता और राज्य की सेवा का दायित्व है. उन्होंने यह भी कहा था कि पुलिसकर्मियों का वेतन जनता के टैक्स के पैसे से मिलता है, इसलिए उनकी पहली जिम्मेदारी जनता की सुरक्षा है.

  

 

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