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हिंदू कानून को सिर्फ मनुस्मृति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए : सॉलिसिटर जनरल

वर्तमान हिंदू कानूनों की मूल आधारशिला स्मृति की परंपरा से जुड़ी हुई हैं. यह प्राचीन विद्वानों द्वारा कानून, नैतिकता और सामाजिक व्यवस्था पर लिखी गयी व्याख्याओं का संकलन हैं. हिंदू कानून को सिर्फ मनुस्मृति से जोड़कर देखना बड़ी गलतफहमी है.
 
सॉलिसिटर जनरल

New Delhi :  वर्तमान हिंदू कानूनों की मूल आधारशिला स्मृति की परंपरा से जुड़ी हुई हैं. यह प्राचीन विद्वानों द्वारा कानून, नैतिकता और सामाजिक व्यवस्था पर लिखी गयी व्याख्याओं का संकलन हैं. हिंदू कानून को सिर्फ मनुस्मृति से जोड़कर देखना बड़ी गलतफहमी है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यहां एक कार्यक्रम में शनिवार को यह बात कही.

 

प्राचीन ज्ञान और कानूनी मेधा विषयक संगोष्ठी में श्री मेहता ने कहा कि वेद व्यक्ति को अपने आसपास के वातावरण के साथ सामंजस्य बनाकर जीने के तरीके बताते हैं, वेद दुनिया के सर्वाधिक पुराने लिखित ज्ञान-स्रोतों में से एक हैं,सॉलिसिटर जनरल  ने जोर देकर कहा, हिंदू कानून वास्तव में स्मृतियों से ही निकले हैं. उन्होंने मनु स्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति, नारद स्मृति, पराशर स्मृति आदि स्मृतियों का जिक्र किया.

 

यह सभी उन प्राचीन विद्वानों की व्याख्याएं हैं, जिन्होंने कानून के क्षेत्र में विशेष अध्ययन किया था.तुषार मेहता के अनुसार  कानून से संबंधित व्याख्याओं वाले हिंदू शास्त्रों की व्याख्या समय- परिस्थितियों के अनुसार नयी समझ के साथ की जा सकती है. उन्होंने  इन अवधारणाओं को तैयार करने वाले विद्वानों की दूरदर्शिता की प्रशंसा की.

 

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, हिंदू कानून की दो प्रमुख परंपराएं मिताक्षरा और दायभाग 700 ईस्वी से पूर्व से प्रचलित हैं. मिताक्षरा परंपरा विज्ञानेश्वर द्वारा प्रतिपादित है जो यह याज्ञवल्क्य स्मृति पर आधारित है, जबकि दायभाग परंपरा का प्रभाव बंगाल और असम के क्षेत्रों में  रहा. सॉलिसिटर जनरल ने मिताक्षरा को अपेक्षाकृत अधिक उदार और समय के साथ विकसित होने वाली व्यवस्था बताया,

 

इसमें जन्म से ही पैतृक संपत्ति में सह-उत्तराधिकार का अधिकार मान्यता प्राप्त था. कहा कि हिंदू धार्मिक और कानूनी ग्रंथों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी व्याख्या में लचीलापन है, जिसने समय के साथ कानूनों को समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित होने का अवसर दिया.

 

उन्होंने कहा कि निकट संबंधियों के बीच विवाह पर रोक जैसी व्यवस्थाएं प्राचीन ग्रंथों में निर्धारित थीं यह आज भी कानून के माध्यम से लागू हैं.अपनी बात रखते हुए श्री मेहता ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक ब्रिटिश काल के कानून देश में लागू रहे. 2023 में केंद्र की मोदी सरकार ने भारतीय न्याय संहिता लागू कर आपराधिक कानूनों को  संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य की जरूरतों के अनुरूप नया स्वरूप प्रदान किया.  
 

 

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