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रांची: जीईएल चर्च में पहली बार महिला बिशप बनाने की जगी उम्मीद

गोस्सनर मध्य विद्यालय बेथेसदा कंपाउंड में 52 पादरियों के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जुबली महोत्सव दूसरे दिन भी जारी रहा. महिला पुरोहित अभिषेक के 25 वर्ष रजत जंयती समारोह में महिला सशक्तिकरण की नई उम्मीद उठी है. कार्यक्रम में अब पहली बार महिला बिशप बनाए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है.
 

Ranchi : गोस्सनर मध्य विद्यालय बेथेसदा कंपाउंड में 52 पादरियों के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जुबली महोत्सव दूसरे दिन भी जारी रहा. महिला पुरोहित अभिषेक के 25 वर्ष रजत जंयती समारोह में महिला सशक्तिकरण की नई उम्मीद उठी है. कार्यक्रम में अब पहली बार महिला बिशप बनाए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है.

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कार्यक्रम में मोडरेटर मार्सल केरकेट्टा, पूर्व मोडरेटर जोहन डांग, सचिव ईश्वर दत्त कंडुलना, मिशन अध्यक्ष आशिषन बागे, महिला अध्यक्ष सोसोरिता कंडुलना और पादरी इदन टोपनो, पादरी पुष्पा टूटी की अगुवाई में मोमेंटम का अनावरण किया गया.

 

इस मौके पर कोलेबिरा विधायक विल्सन कोनगाड़ी, राज्यसभा सांसद महुआ मांझी और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भी अपने विचार रखे. मंत्री ने कहा कि महिलाओं की सफलता और संघर्ष दोनों को याद करना जरूरी है. समाज में जो मानसिक गुलामी चली आ रही है. उसे तोड़ने का समय अब आ गया है.

 

उन्होंने कहा कि जब महिलाएं पुरोहित बन सकती हैं, तो अब बिशप क्यों नहीं? आने वाला समय महिला नेतृत्व का है. उन्होंने कहा कि समाज में 50 प्रतिशत महिलाएं की सीटे आरक्षित हैं, लेकिन प्रतिनिधित्व अब भी सीमित है.

 

ऐसे में महिला पादरियों की भूमिका आगे बढ़ाने की जरूरत है ताकि वे समाज के दर्द को और संवेदना से समझ सकें. महिला पादरियों को अंधविश्वास को दूर करने की आवश्यकता है. क्योंकि सुदुर गांवों खूंटी, गुमला, लोहरदगा जैसे गांवों में महिलाओं को डायन बताकर प्रताड़ित किया जाता है. उनकी हत्या की जा रही है. ऐसे अंधविश्वास को रोकना जरूरी है.

 

लुथरेन वर्ल्ड फेडरेशन के सदस्य रंजीता बोरगुअरी ने कहा कि जीईएल चर्च की 52 महिला पादरियों ने यीशु मसीह की अगुवाई में इतिहास रचा है. तीन महिला पादरियों को बिशप मोडरेटर द्वारा पुरोहिताई अभिषेक दिया गया था. आज यह 52 महिलाएं पादरी बन गए है.

 

अब इस जीईएल चर्च में महिला नेतृत्व करने का मौका मिले. इसके लिए महिलाओं को आगे आगे आना होगा. 25 साल की इस जुबली महोत्सव में अब समय आ गया है कि चर्च में एक महिला बिशप बने. 2026 में किसी महिला पादरी को बिशप या सचिव के रूप में देखने की उम्मीद है.

 

राज्य सभा सांसद महुआ मांझी ने कहा कि महिला पादरियों को बधाई देते हुए कहा कि आज देश महिला सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहे है. इसे समाज द्वारा स्वीकृति मिल रही है. आज महिलाएं उच्चे पायदान की ओर आगे बढ़ रही है, समाज का नेतृत्व भी कर रही है.

 

सरकार भी महिला सशक्तिकरण पर काम कर रहे है. महिलाओं के विकास और स्वावलंबी के लिए कई योजनाए चालु किए है. इसका लाभ सभी महिलाएं उठाये.

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