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Exclusive: JPSC घोटाला केस में CBI जांच की मांग कितनी जायज, 14 वर्षों का रिकॉर्ड ऐसा रहा

झारखंड में 14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच को लेकर विपक्ष और कुछ अभ्यर्थी लगातार CBI जांच की मांग कर रहे हैं. सरकार की मंशा और CID की जांच पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.
 

Ranchi: झारखंड में 14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच को लेकर विपक्ष और कुछ अभ्यर्थी लगातार CBI जांच की मांग कर रहे हैं. सरकार की मंशा और CID की जांच पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. मगर इन तमाम सवालों के बीच एक अहम हकीकत यह भी है कि JPSC घोटाले की जांच करीब 14 वर्षों से CBI के पास रही, लेकिन मामला अब तक अपने मुकम्मल अंजाम तक नहीं पहुंच सका.

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झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2012 में विजिलेंस थाना कांड संख्या 23/10 की आगे की जांच CBI को सौंपी गई थी. इससे पहले तत्कालीन निगरानी विभाग ने अपनी तफ्तीश में उत्तर पुस्तिकाओं में कथित हेरफेर और अनियमितताओं के आधार पर 19 लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी थी. इनमें प्रमोद कुमार लाल, राधा प्रेम किशोर, बिनोद राम, हादी शंकर बाउरी, हरखास सिंह मुंडा, रवि कुमार किस्कू, मुकेश कुमार महतो, कुंदन कुमार सिंह, मौसमी नागेच, कानू राम नाग, लाल मनोज नाथ सहदेव, प्रकाश कुमार, कुमारी गीतांजलि, संगीता कुमारी, रजनीश कुमार, शिवेन्द्र, संतोष कुमार चौधरी, कुमार शैलेन्द्र और हरि उरांव के नाम शामिल थे.

 

दस्तावेजों के मुताबिक फोरेंसिक जांच में कई उत्तर पुस्तिकाओं और इंटरव्यू अंकों में बदलाव का जिक्र किया गया. बाद में CBI ने RC-06(A)/2012-AHD-R दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली. याचिका में दावा किया गया है कि 172 चयनित अभ्यर्थियों, 139 संदिग्ध उत्तर पुस्तिकाओं और कई अन्य मामलों की जांच के बावजूद पूरी कार्रवाई अपने मुकम्मल नतीजे तक नहीं पहुंच सकी. हाल में दायर याचिका में CBI की जांच पर भी कई सवाल उठाए गए हैं और जांच अधिकारियों की भूमिका की अलग से जांच कराने की मांग की गई है.

 

दूसरी ओर, 14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID ने कम समय में लगातार कार्रवाई की है. अब तक इस मामले में 19 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. पूर्व JPSC अध्यक्ष, आयोग से जुड़े अधिकारी, निजी एजेंसी से जुड़े लोगों समेत कई आरोपियों से पूछताछ की गई है. कई जिलों में छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं.

 

यही वजह है कि जो लोग आज केवल CBI जांच की मांग कर रहे हैं, उन्हें पुराने JPSC घोटाले की CBI जांच का रिकॉर्ड भी देखना चाहिए. सवाल यह उठ रहा है कि जब वर्षों तक CBI जांच के बावजूद मामला मुकम्मल अंजाम तक नहीं पहुंच सका, तब मौजूदा मामले में कम समय में हुई CID की कार्रवाई को किस नजर से देखा जाए.

 

बहरहाल, यह भी उतना ही अहम है कि किसी भी जांच एजेंसी का अंतिम आकलन अदालत में पेश किए गए सबूत, अभियोजन और न्यायिक फैसले के आधार पर होता है. इसलिए किसी भी एजेंसी की जांच का अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.

 

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