- दुबई-बैकॉक समेत कई देशों में यात्रा की चर्चा
- नेपाल में बाढ़ आने के बाद पहुंचा था वाराणसी
- एटीएस खंगाल रही संपर्क और आर्थिक नेटवर्क
Ranchi News : टीएसपीसी के कमांडर बृजेश गंझू के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद उसके पासपोर्ट की फोटो की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. वायरल तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि बृजेश गंझू के पास पासपोर्ट था और वह दुबई, बैंकॉक समेत कई देशों की यात्रा कर चुका था. हालांकि, पासपोर्ट की तस्वीर और विदेश यात्राओं से जुड़ी इन जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. बृजेश गंझू का कई सीनियर आईपीएस अधिकारियों के साथ संपर्क था.
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नेपाल में बाढ़ आने के बाद पहुंचा था वाराणसी
बताया जा रहा है कि बृजेश गंझू हाल के दिनों में नेपाल में था. नेपाल में बाढ़ की स्थिति के बाद उसके वाराणसी पहुंचकर कुछ दिनों तक छिपे रहने की चर्चा है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी है कि बृजेश गंझू वाराणसी में कितने दिनों से रह रहा था और इस दौरान उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे. उसके ठिकाने, मददगारों और संपर्क के नेटवर्क की भी जांच की जा रही है.
करोड़ों की संपत्ति और निवेश की भी जांच
बृजेश गंझू के आर्थिक नेटवर्क को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं. चर्चा है कि उसने नक्सली गतिविधियों के जरिए करीब एक हजार करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की थी और झारखंड समेत दूसरे राज्यों में रकम का निवेश किया गया है. जांच एजेंसियां अब उसके बैंक खातों, संपत्ति, निवेश और अन्य आर्थिक गतिविधियों की जानकारी जुटाने में लगी हैं.
कैसे और कहां से बना पासपोर्ट, खंगाल रही एजेंसी
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख रुपये और एनआईए की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित होने के बावजूद बृजेश गंझू का पासपोर्ट कैसे जारी हुआ. पासपोर्ट कब बना, कहां बना और किस पते के आधार पर जारी किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है. यह पासपोर्ट चतरा जिले से बना था या झारखंड के किसी दूसरे जिले से, जांच एजेंसियां इस बिंदु को भी खंगाल रही हैं.
टेरर फंडिंग मामले में था वांटेड
बता दें कि NIA ने करीब आठ साल पहले उसे टेरर फंडिंग मामले में वांटेड घोषित किया था. ब्रजेश चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र का रहने वाला था. झारखंड में लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था. पलामू प्रमंडल में TPC से जुड़े नक्सली बीड़ी पत्ता के ठेकेदारों से लेवी वसूलते रहे हैं.
वहीं, पड़ोसी चतरा जिले में सीसीएल की आम्रपाली और मगध कोयला परियोजनाओं के शुरू होने के बाद संगठन ने कोयला कारोबार को भी निशाना बनाया. यहां नक्सली दस्ते कोयला खनन में लगी आउटसोर्सिंग और परिवहन कंपनियों से लेवी वसूलते रहे हैं. ब्रजेश गंझू पर व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और ठेकेदारों से वसूली के भी आरोप रहे हैं.
संगठन के दस्ते विशेष रूप से चतरा और पलामू प्रमंडल के इलाकों में लेवी वसूली और अन्य आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं. चतरा की आम्रपाली और मगध कोयला परियोजनाओं के अलावा परिवहन और आउटसोर्सिंग कारोबार से जुड़े लोगों पर भी संगठन की नजर रही है.
ब्रजेश गंझू के मारे जाने को झारखंड में सक्रिय टीएसपीसी के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के लिहाज से अहम माना जा रहा है. एटीएस ने शव को लाल बहादुर शास्त्री पोस्टमार्टम हाउस में रखवाया है. मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है.
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