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युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान,  ईरान ने खाड़ी देशों से मुआवजा मांगा, कारण भी बताया

Tehran :  संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने मांग की है कि बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और जॉर्डन युद्ध के दौरान ईरान हुए नुकसान की भरपाई करे,क्योंकि उन लोगों ने अमेरिका और इजराइल की मदद की है. साथ ही उन्होंने ईरानी बंदरगाहों की कथित नौसैनिक नाकाबंदी पर अमेरिका की कड़ी निंदा की और इसे ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन बताया है, 

 

 

उन्होंने आरोप लगाया कि इन देशों ने अमेरिका और इज़राइल को अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी, जिससे ईरान पर हमले संभव हुए,  हमलों में ईरान की संपत्ति और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा.

 

इसलिए अब इन देशों को ईरान पुनर्निर्माण का खर्च उठाना चाहिए. ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने भी कहा है कि मुआवजे की मांग पर कोई समझौता नहीं होगा. जिन देशों ने इस युद्ध को बढ़ावा दिया, वे नहीं सकते. 

 

ईरान के केंद्रीय बैंक की एक रिपोर्ट में बताया है कि युद्ध के कारण देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है. तेल रिफाइनरी और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लगभग बर्बाद हो गये हैं. इस कारण ईरानी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह संभलने में 12 साल से ज्यादा का समय लग सकता है.  

 

रिपोर्ट में चेताया गया है महंगाई 180फीसदी तक बढ़ सकती है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ेंगी.  ईरानी राजदूत ने जिन खाड़ी देशों पर आरोप लगाये गये हैं, उनकी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आयी है.  


 
राजदूत अमीर सईद इरावानी  ने यब बयान तब दिया है,जब इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच हुई   बातचीत बिना किसी नतीजे पर पहुंचे खत्म हो गयी. बता दें कि इस बातचीच में ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबफ और अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस  शामिल थे.

 

 

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