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इस्तीफा देनेवाली IAS दिव्या मित्तल राजनीति करेंगी, वीडियो जारी कर किया ऐलान

Lagatar Desk :  एक महिला मुझसे आकर मिली, मुझे लगा वह मुझसे राशन कार्ड, पेंशन या पक्का मकान मांगेगी. लेकिन उसने जो मांगा उससे मेरा सिर शर्म से झुक गया. उसने मुझे कहा कि उसके गांव में सिर्फ पांचवीं क्लास तक का स्कूल है. उस वक्त उसके घर पर छत नहीं थे और घर में पानी भी नहीं था. लेकिन उसने स्कूल मांगा. मैंने नियम देखे, तो स्कूल दिया जा सकता था. इसके बाद स्कूल स्वीकृत किया. आज तीन साल बाद भी स्कूल बनना शुरू नहीं हुआ है.
 
आईएएस दिव्या मित्तल

Lagatar Desk :  उत्तर प्रदेश कैडर की IAS दिव्या मित्तल राजनीति के क्षेत्र में जाएंगी. इसका ऐलान उन्होंने एक वीडियो जारी कर किया है. उन्होंने पिछले महीने ही इस्तीफा दिया था, जिसको लेकर कई सवाल उठे थे. वीडियो में दिव्या मित्तल ने कहा कि इस्तीफा के बाद लोग हमसे कई सवाल कर रहे थे. आगे क्या? आगे राजनीति करूंगी. मुझे आवाज बनना है, उनकी आवाज जिनकी आवाज सरकारी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती. 

 

मैं यहां अफसर बन कर आयी थी, लेकिन यहां के लोगों ने बेटी बनाया. उत्तर प्रदेश की मिट्टी ही हमारी जन्मभूमि, कर्मभूमि है, इसलिए राजनीति की शुरुआत यहीं से करूंगी. उत्तर प्रदेश ने हमेशा लोगों को राह दिखायी है. दिव्या मित्तल ने लोगों से जुड़ने की अपील की. वाट्सएप नंबर (98956957) पर मैसेज करके लोग जुड़ सकते हैं. 

 

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IAS दिव्या मित्तल ने कहा कि एक बार मैं लहुड़िया पहाड़ी पर पानी पहुंचाने के लिए निरीक्षण कर रही थी. वहां एक महिला मुझसे आकर मिली, मुझे लगा वह मुझसे राशन कार्ड, पेंशन या पक्का मकान मांगेगी. लेकिन उसने जो मांगा उससे मेरा सिर शर्म से झुक गया. उसने मुझे कहा कि उसके गांव में सिर्फ पांचवीं क्लास तक का स्कूल है. उस वक्त उसके घर पर छत नहीं थे और घर में पानी भी नहीं था. लेकिन उसने स्कूल मांगा. मैंने नियम देखे, तो स्कूल दिया जा सकता था. इसके बाद स्कूल स्वीकृत किया. आज तीन साल बाद भी स्कूल बनना शुरू नहीं हुआ है. क्यों शुरू नहीं हुआ, इसके पीछे इरादा नहीं होना है. मुझे उन गायब स्कूलों का हिसाब चाहिए.

 

जब मैं राजस्व विभाग में थी. तब एक व्यक्ति कागज लेकर आया. बताया कि भूमि का पट्टा तो मिल गया, लेकिन जमीन नहीं मिला. मैंने जांच करायी तो कागज फर्जी पाया गया. कार्रवाई हुई. उस व्यक्ति को फिर से भूमि का पट्टा दिया गया, लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं मिला. पता किया तो बताया गया कि ऊपर के लोग नहीं चाहते. ये ऊपर के लोग कौन हैं? न्याय तो उसका हक है. फिर ऊपर से दिया गया कृपा क्यों?

 

मैं एक साधारण परिवार की लड़की हूं. मुझसे देश ने वादा किया, पढ़ो, पढ़ा तो आईएएस बनी. लेकिन आज के युवाओं को जॉब नहीं मिल रहा. क्यों नहीं मिल रहा? इस सवाल का जवाब चाहिए. आज सत्ता के पास सबकुछ है. पैसा है, शिलान्यास है, लेकिन काम नहीं है. इसे बदलने की जरुरत है. हमें वो राजनीति चाहिए, जो लोगों को सुनती है. क्योंकि लोग ही मंजिल हैं. जिन झंडों से पिछले 70  सालों में हिसाब नहीं मिला, उन झंडों के साथ कैसे सवालों का जवाब मिलेगा.

 

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