Copenhagen : वेनेजुएला प्रकरण के बाद दुनिया के कई देशों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का खौफ कायम हो गया है. वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड सुर्खियों में है, दरअसल ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने की बात कही थी है.
रविवार को उन्होंने पत्रकारों के समक्ष कहा,आगामी 20 दिन में ग्रीनलैंड पर चर्चा करेंगे. ट्रंप के मुंह से ग्रीनलैंड शब्द सुनते ही पूरी दुनिया में हलचल मच गयी है.
ट्रंप के बयन को लेकर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने सोमवार को नाटो को चेताते हुए कहा कि यदि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश करता है तो यह सैन्य गठबंधन NATO का अंत साबित होगा. अहम बात यह है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और NATO का हिस्सा है.
फ्रेडरिक्सन ने आशंका जताई कि अगर अमेरिका किसी दूसरे NATO देश पर सैन्य हमला करता है, तो सब कुछ ठहर जायेगा. दरअसल NATO द्वितीय विश्व युद्ध है. फ्रेडरिक्सन ने कहा कि ट्रंप के बयानों को हल्के में नहीं ले सकते, डेनमार्क किसी भी तरह की धमकी स्वीकार नहीं करेगा.
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नील्सन ने चिंता जताते हुए कहा, ग्रीनलैंड की तुलना वेनेजुएला से नहीं की जा सकती. उन्होंने विश्वास जताया कि अमेरिका रातोंरात ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं कर सकता. उन्होंने देश की जनता से एकजुट और शांत रहने की अपील की. यूरोप के कई नेताओं ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के समर्थन में बयान जारी किये हैं.
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