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सांस लेने में दिक्कत हो, तो 40 मिनट पेट के बल लेट जाये, यह नेचुरल वेंटीलेटर है

Lagatar Desk : कोरोना संक्रमण के कारण ज्यादातर मरीजों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है. ऑक्सीजन का लेवल कम होने पर अस्पताल जाना पड़ता है. मगर वहां भी ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की भारी कमी है. ऐसे मरीजों के लिए प्रोन पोजीशन ऑक्सिजनेशन तकनीक 80% तक कारगर साबित हुई है. चीनी शोधकर्ताओं ने अपनी एक नयी रिसर्च में प्रोन पोजीशन को अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों के लिए संजीवनी बताया है.

चीन के शोधकर्ताओं ने किया था रिसर्च

यह रिसर्च अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पिरेट्री एंड क्रिटकल केयर मेडिसिन में छपी है. कोरोना संक्रमण के गढ़ रहे चीन के वुहान शहर में इस वायरस से जूझ रहे मरीजों पर यह प्रयोग किया गया है. इसमें बताया गया है कि अगर मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो, तो उन्हें पेट के बल लिटाना चाहिए और मुंह को तकिये पर रखना चाहिए. कोरोना पीड़ित का वेंटीलेटर पर उल्टा लेटना फेफड़ों के लिए बेहतर है. साउथवेस्ट यूनिवर्सिटी,  चीन के शोधकर्ता हैबो क्यू के अनुसार ऐसा करने से फेफड़ों पर पॉजिटिव प्रेशर बढ़ता है और मरीज को राहत महसूस होती है. वुहान में 10 कोरोना मरीजों पर यह रिसर्च की गयी.

40 मिनट लेटने से बढ़ जाता है ऑक्सीजन का लेवल

प्रोन पोजीशन में 40 मिनट तक लेटने से ऑक्सीजन का लेवल सुधर जाता है. पेट के बल लेटने से वेंटीलेशन परफ्यूशन इंडेक्स में बहुत सुधार आ जाता है. कोरोना काल में डॉक्टरों ने कोविड के कारण सांस लेने में दिक्कत झेल रहे मरीजों को सलाह दी है कि वह इस तकनीक को अपनायें. प्रोन पोजीशन एक्यूट रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम में इस्तेमाल की जाती है. एआरडीएस की हालत में फेफड़ों के निचले भाग में तरल जमा हो जाता है. पीठ के बल लेटने से ऑक्सिजनेशन और कार्बन डाइऑक्साइड को निकालने की प्रक्रिया में परेशानी होती है. ऐसी स्थिति में प्रोन वेंटिलेशन दिया जाता है.

ऐसा होता है प्रोन पोजीशन

प्रोन पोजीशन में गर्दन के नीचे एक तकिया, पेट और घुटनों के बीच में दो तकिये लगाते हैं. एक तकिया पंजों के नीचे लगाया जाता है. हर 6 से 8 घंटे में 40 से 45 मिनट तक यह प्रक्रिया अपनाने से मरीज को काफी फायदा पहुंचता है. साधारण रूप में पेट के बल लेट कर हाथों को कमर के पास समानांतर भी रख सकते हैं. इस अवस्था में फेफड़ों में खून का संचार बेहतर होने लगता है. फेफड़ों में मौजूद तरल पदार्थ इधर उधर हो जाता है. इससे फेफड़ों में ऑक्सीजन आसानी से पहुंचती रहती है. प्रोन पोजीशन वेंटिलेशन सुरक्षित और खून में ऑक्सीजन का लेवल नियंत्रित करने में काफी मददगार है. यह बीमारी के कारण होने वाली मृत्यु दर को भी कम करने में सहायता करता है. डॉक्टरों के अनुसार आईसीयू में भर्ती मरीजों में इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं. वेंटिलेटर नहीं मिलने की स्थिति में भी यह पोजीशन बहुत कारगर है. 80% मामलों में इसके बेहतर नतीजे मिले हैं.

 

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