Jamshedpur News: जमशेदपुर में अपराध की घटनाओं के बीच अब अवैध लॉटरी और सट्टा कारोबार जोरों पर किया जा रहा है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं. पुलिस को लगातार अवैध लॉटरी की शिकायत भी मिल रही है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. जानकारी के अनुसार, साकची, जुगसलाई, बागबेड़ा, सीतारामडेरा और परसुडीह जैसे इलाकों में कथित अवैध लॉटरी का खेल चल रहा है.
सवाल यह है कि अगर बाजार और सार्वजनिक जगहों के आसपास खुलेआम लॉटरी का कारोबार चलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो स्थानीय पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लग रही? और अगर जानकारी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
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चापड़ के खौफ से 'चापड़पुर' नाम की चर्चा, अब लॉटरी के कारोबार ने बढ़ाई चिंता
कुछ समय पहले जमशेदपुर में लगातार चापड़ और धारदार हथियारों से हमले की घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में शहर को तंज के तौर पर 'चापड़पुर' तक कहा जाने लगा था. सितंबर में कदमा के शास्त्रीनगर में युवक पर चापड़ से हमला हुआ, जेम्को में ट्रेलर चालक पर चापड़ से हमला किया गया और इन घटनाओं में पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी.
यानी शहर में अपराध और हिंसा को लेकर पहले से ही चिंता का माहौल है. दूसरी तरफ अब अवैध लॉटरी, सट्टा और मटका जैसे कारोबार के फैलने की खबरें सामने आ रही हैं. ऐसे में सवाल सिर्फ लॉटरी बेचने वालों पर कार्रवाई का नहीं है, बल्कि थाना स्तर की निगरानी व्यवस्था पर भी है.
जब खुलेआम बिक रहा है तो पुलिस को क्यों नहीं दिख रहा?
अवैध लॉटरी का खेल किसी बंद कमरे में नहीं चलता. टिकट बेचने वाले बाजारों, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास ग्राहकों को जोड़ते हैं. मजदूर, बेरोजगार युवक और कम आय वाले लोग जल्दी पैसा कमाने के लालच में इस कारोबार में खिंचते हैं. धीरे-धीरे उनकी कमाई का हिस्सा इसी जुएनुमा खेल में जाने लगता है.
जमशेदपुर में लॉटरी कारोबार को लेकर सवाल पहले भी उठ चुके हैं. मई में धतकीडीह में कथित अवैध लॉटरी-जुआ के खिलाफ कार्रवाई की खबर सामने आई थी, जिसमें तीन लोगों की गिरफ्तारी और नकदी समेत सामान बरामद होने की बात कही गई थी.
इसके बावजूद सितंबर में फिर कई थाना क्षेत्रों में कथित अवैध लॉटरी कारोबार की शिकायतें सामने आना बताता है कि कार्रवाई के बाद भी इस तरह की गतिविधियों पर स्थायी रोक लगाने की चुनौती बनी हुई है.
'पुलिस संरक्षण' का आरोप, लेकिन जांच कौन करेगा?
जमशेदपुर में सट्टा, मटका और जुआ को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठाए गए हैं. विधायक सरयू राय ने इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है. वहीं एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लॉटरी कारोबार को पुलिस संरक्षण मिलने और कुछ अधिकारियों तक कथित रूप से रकम पहुंचने के आरोप लगाए गए हैं. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें जांच के बाद ही तथ्य माना जा सकता है.
लेकिन यही आरोप अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़े केते हैं -अगर अवैध लॉटरी का कारोबार वास्तव में कई थाना क्षेत्रों में चल रहा है, तो उसका नेटवर्क कौन चला रहा है, पैसा किस तक पहुंच रहा है और स्थानीय स्तर पर इसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है?
अपराध समीक्षा बैठक होती है, फिर अवैध कारोबार पर निगरानी क्यों नहीं?
16 सितंबर को जमशेदपुर पुलिस की मासिक अपराध समीक्षा बैठक में लंबित मामलों, नशे के कारोबार, अवैध हथियार और फरार अपराधियों की गिरफ्तारी समेत कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी. एसएसपी स्तर पर लंबित मामलों के तेजी से निष्पादन के निर्देश भी दिए गए.
ऐसे में अवैध लॉटरी और सट्टे की शिकायतों को भी उसी गंभीरता से देखने की जरूरत है. सवाल सीधा है - क्या पुलिस थानों को अपने-अपने इलाके में चल रहे इस कारोबार की जानकारी नहीं है, या जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही?
भाजपा नेता अभय सिंह ने उठाया मामला
भाजपा नेता अभय सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग करते हुए जमशेदपुर की स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने लिखा कि "Hemant Soren जी, जमशेदपुर को बचा लीजिए. नई नस्ल के बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है. अवैध सट्टा, मटका, लॉटरी और जुआ चल रहा है और यह जमशेदपुर के खुलेआम बाजारों में दुकानों के बाहर हो रहा है. किसी भी आम आदमी से पूछकर इसकी हकीकत पता लगाइए. यह लौहनगरी के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. शहर बर्बाद हो रहा है और नए उम्र के लड़के इस धंधे में लिप्त हो रहे हैं."
अभय सिंह ने आगे आरोप लगाया कि ब्राउन शुगर, अफीम, गांजा और चरस की बिक्री भी जगह-जगह हो रही है. उन्होंने सरकार की नशा बंद करने की मुहिम पर सवाल उठाते हुए लिखा कि जब अपने ही लोग इसमें लिप्त होंगे तो नशा कैसे बंद होगा.
उन्होंने कहा कि कब और कहां अपराध हो जाए, यह किसी से छिपा नहीं है. इसके बाद उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए लिखा कि अगर खजाने की कमी है तो अवैध धंधों का लाइसेंस ही जारी कर दिया जाए, जिससे सरकार को राजस्व भी मिलेगा और खजाना भी भर जाएगा.
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