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झारखंड की अर्थव्यवस्था पर थमी थोक महंगाई का असर: उद्योगों को राहत, किसानों की चुनौती बरकरार

Ranchi: देश में थोक महंगाई दर (WPI) सितंबर 2025 में लगभग स्थिर रही. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक में सालाना आधार पर केवल 0.13 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसका अर्थ है कि थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में अधिक बदलाव नहीं हुआ. महंगाई में यह ठहराव मुख्य रूप से खाद्य और प्राथमिक वस्तुओं के दाम घटने से दर्ज हुआ, जबकि कुछ विनिर्मित उत्पादों और ईंधन श्रेणियों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

 

सितंबर में सभी वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक 154.9 रहा, जो अगस्त के 154.7 से थोड़ा अधिक है. महीने-दर-महीने आधार पर यह सूचकांक 0.19 प्रतिशत घटा. प्राथमिक वस्तुओं के दाम सालाना आधार पर 3.32 प्रतिशत घटे, जबकि खाद्य वस्तुओं में 1.99 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. सब्जियों, दालों और तिलहनों की कीमतों में गिरावट आई, वहीं प्याज और आलू के दाम बढ़े. ईंधन और ऊर्जा समूह की कीमतें लगभग स्थिर रही.

 

विनिर्मित उत्पादों के दाम सालाना आधार पर 2.33 प्रतिशत बढ़े. खाद्य उत्पाद, वस्त्र, विद्युत उपकरण और सीमेंट जैसे गैर-धात्विक उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हुई. जबकि रबर, प्लास्टिक, मोटर वाहन और दवाओं के दाम घटे. मंत्रालय के अनुसार, सितंबर के आंकड़े अस्थायी हैं और अगले 10 सप्ताह में संशोधित किए जा सकते हैं.

 

झारखंड में थोक महंगाई की स्थिरता का प्रभाव उद्योगों और कृषि क्षेत्र दोनों पर देखा जा रहा है. औद्योगिक क्षेत्र जैसे जमशेदपुर, बोकारो और आदित्यपुर में स्थिर इनपुट लागत से स्टील, सीमेंट और मशीनरी उद्योगों की उत्पादन लागत पर नियंत्रण बना हुआ है. वहीं  गैर-धात्विक खनिज उत्पादों और विद्युत उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी इन क्षेत्रों से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है.

 

कृषि क्षेत्र में सब्जियों, दालों और अनाज के दाम घटने से किसानों की आमदनी पर असर पड़ा है. पलामू, गिरिडीह, कोडरमा और रांची जिलों में यह प्रभाव अधिक दिखाई दे रहा है. जहां किसान इन फसलों पर निर्भर हैं.खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट से खुदरा बाजार में आने वाले महीनों में कुछ राहत की संभावना है. हालांकि परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला लागत में भिन्नता के कारण राज्य के विभिन्न जिलों में इसका प्रभाव समान नहीं होगा.

 

वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में औसत थोक महंगाई दर 0.14 प्रतिशत रही, जो कीमतों में स्थिरता को दर्शाती है. आने वाले महीनों में महंगाई दर का रुझान खाद्य वस्तुओं की कीमतों, वैश्विक कच्चे तेल की दरों और घरेलू विनिर्माण मांग पर निर्भर करेगा. अक्टूबर के थोक महंगाई आंकड़े त्योहार और खरीदारी सीजन के प्रभाव को स्पष्ट करेंगे.

 

 

 

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