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राज्य टीबी फोरम की बैठक में लिए गए टीबी उन्मूलन पर अहम फैसले

Ranchi: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) की राज्य टीबी फोरम की बैठक सोमवार को नेपाल हाउस, डोरंडा में आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग अजय कुमार सिंह ने की. 

बैठक में एनएचएम के प्रबंध निदेशक शशि प्रकाश झा, निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.

 

बैठक में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करते हुए अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में संभावित टीबी मामलों की संख्या कम आ रही है, वहां कारणों की गहन समीक्षा कर जांच की संख्या बढ़ाई जाए. 

 

उन्होंने सभी सरकारी विभागों को अपने-अपने अधीन संवेदनशील समूहों की स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने और निक्षय पोर्टल पर शत-प्रतिशत डेटा प्रविष्टि के निर्देश दिए.

 

उन्होंने उद्योग विभाग को निक्षय मित्र पहल के तहत टीबी मरीजों को गोद लेने और सहयोग प्रदान करने के लिए आवश्यक पत्राचार करने को कहा. राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि जोखिम वाले समूहों और क्षेत्रों में निक्षय वाहन, मोबाइल मेडिकल यूनिट और हैंड-हेल्ड एक्स-रे के जरिए संभावित टीबी मरीजों की पहचान तेज की जा रही है.

 

बैठक में कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि धनबाद में कल्चर ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग लैब पूर्ण रूप से क्रियाशील हो चुकी है, जिससे आईआरएल इटकी, रांची का भार कम हुआ है. रिम्स में सीडीएसटी लैब का सुदृढ़ीकरण कार्य पूरा कर लिया गया है, जिसका उद्घाटन शीघ्र किया जाएगा. डाक विभाग के सहयोग से नमूना संग्रह और परिवहन सेवा की शुरुआत रांची में की गई है, जिसे 15 जनवरी 2026 तक पूरे राज्य में लागू किया जाएगा.

 

राज्य के 18 जिलों में पंचायत टीबी फोरम का गठन किया जा चुका है. रांची, चतरा, लातेहार, जमशेदपुर, बोकारो, कोडरमा और गिरिडीह जिलों में हैंड-हेल्ड एक्स-रे उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे सामुदायिक स्तर पर टीबी स्क्रीनिंग को बढ़ावा मिल रहा है.

 

आगामी कार्य योजना पर चर्चा करते हुए अपर मुख्य सचिव ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनभागीदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया. उन्होंने न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट जांच की संख्या बढ़ाने, सभी पंचायतों में टीबी फोरम के गठन, नि-क्षय मित्रों की संख्या में वृद्धि और टीबी मरीजों को अतिरिक्त पोषण सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

 

बैठक में चरणबद्ध तरीके से 134 अतिरिक्त हैंड-हेल्ड एक्स-रे की तैनाती, 24 जिलों में ट्रूनेट मशीनों की खरीद, उपकरणों के एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट, नियमित जिला टीबी पदाधिकारियों की नियुक्ति और आगामी 100 दिवसीय टीबी अभियान की तैयारी पर भी विस्तार से चर्चा हुई.

 

बैठक में डाक विभाग, खाद्य एवं उपभोक्ता मामले विभाग, श्रम विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, शिक्षा विभाग, झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स, परिवहन विभाग और पंचायती राज विभाग सहित कई विभागों के राज्यस्तरीय अधिकारी शामिल हुए.

 

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी विभागों और समाज के सहयोग से टीबी उन्मूलन अभियान को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा.

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