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सदन में हेमलाल मुर्मू ने पेशा नियमावली को बताया ऐतिहासिक फैसला, विपक्ष को घेरा

Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र  के आठवें दिन सत्ता पक्ष के विधायक हेमलाल मुर्मू ने राज्य सरकार के बजट का जोरदार समर्थन किया. उन्होंने विपक्ष के कटौती प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि यह बजट राज्य के विकास को नई दिशा देगा.
 

Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र  के आठवें दिन सत्ता पक्ष के विधायक हेमलाल मुर्मू ने राज्य सरकार के बजट का जोरदार समर्थन किया. उन्होंने विपक्ष के कटौती प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि यह बजट राज्य के विकास को नई दिशा देगा.

हेमलाल मुर्मू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए 1,58,560 करोड़ रुपये के बजट को प्रगतिशील बताया. उन्होंने कहा कि यह बजट गरीब, आदिवासी और ग्रामीण लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

 

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अपने संबोधन में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सराहना करते हुए कहा कि सोना को जितना गलाओगे, वह उतना ही चमकेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने सीबीआई, ईडी और एनआईए जैसी एजेंसियों के माध्यम से युवा मुख्यमंत्री को परेशान किया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दी है. उन्होंने विपक्ष से कहा कि वे नकारात्मक राजनीति छोड़कर विकास के लिए सहयोग करें.

 

मुर्मू ने पेशा नियमावली को ऐतिहासिक फैसला बताया. उन्होंने कहा कि इससे आदिवासियों के प्राकृतिक और सामुदायिक संसाधनों पर ग्राम सभा का अधिकार मजबूत होगा. उन्होंने मांग की कि हर गांव में ग्रामसभा का अलग भवन बनाया जाए. ग्रामसभा की बैठक पंचायत भवन से अलग हो ताकि वह स्वतंत्र रूप से काम कर सके. उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामसभा के लिए महिला सहायक सचिव की नियुक्ति हो और उन्हें मानदेय दिया जाए.

 

अबुआ आवास योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जब केंद्र ने प्रधानमंत्री आवास योजना बंद कर दी, तब राज्य सरकार ने 4,100 करोड़ रुपये के बजट से यह योजना शुरू की. उन्होंने इसे गरीबों के लिए बड़ा कदम बताया. ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए 581.74 करोड़ रुपये के प्रावधान को भी उन्होंने विकास के लिए जरूरी बताया.

 

टेंडर प्रक्रिया को लेकर उन्होंने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि 25 से 49 प्रतिशत तक कम दर पर टेंडर लेने से काम की गुणवत्ता प्रभावित होती है. उन्होंने सुझाव दिया कि 10 प्रतिशत से ज्यादा बिलो टेंडर को रद्द किया जाए. साथ ही योग्य इंजीनियरों की नियुक्ति की बात कही ताकि योजनाएं सही तरीके से पूरी हो सकें.

 

अपने भाषण में उन्होंने आदिवासी पहचान का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि आदिवासी प्रकृति पूजक हैं और उनकी अपनी अलग परंपरा और संस्कृति है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को समझना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासियों को अपनी पहचान साबित करने के लिए बार-बार परेशान नहीं किया जाना चाहिए.

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