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झारखंड विस : नीरा यादव ने सदन में DMFT फंड, अबुआ आवास योजना सहित कई मुद्दे उठाये

Ranchi :  झारखंड विधानसभा बजट सत्र में कोडरमा विधायक नीरा यादव ने ग्रामीण विकास विभाग, अबुआ आवास योजना, DMFT फंड और वन भूमि से जुड़े कई मुद्दों को सदन में उठाया. उन्होंने कहा कि राज्य में धरातल पर विकास नजर नहीं आ रहा है.

 

विधायक ने कहा कि दीमक भी दिन-रात मेहनत करते हैं. लेकिन उनका काम विनाश करना होता है. इसी तरह अगर योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं होगा तो जनता को फायदा नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा कि जब तक बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं होगा, तब तक आम लोगों का जीवन स्तर नहीं सुधरेगा.

 

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यादव ने केंद्र से राशि नहीं मिलने के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया. कहा कि केंद्र को 47,367 से ज्यादा उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं भेजे गए हैं, जिस कारण राशि लंबित है. उन्होंने वित्त मंत्री से विभागवार बकाया राशि का ब्यौरा देने की मांग की. साथ ही सुझाव दिया कि राज्य के सभी विधायक और सांसद मिलकर संयुक्त बैठक करें और केंद्र से राज्य का हक लेकर आएं.

 

कोडरमा विधायक ने अबुआ आवास योजना को लेकर भी सरकार को घेरा. कहा कि वर्ष 2024-25 के लिए 6.5 लाख आवास बनाने का लक्ष्य था, लेकिन अब तक केवल 18,849 आवास ही पूरे हुए हैं.

 

सवाल उठाया कि बाकी गरीबों का क्या हुआ. कहा कि कई जगहों पर गरीबों के मकान अधूरे रह गए और गिरने की स्थिति में पहुंच गए. नीरा ने पाकुड़ और दुमका जिले के जरमुंडी क्षेत्र में जियो टैगिंग में गड़बड़ी और किस्तों के भुगतान में देरी का भी आरोप लगाया

 

उन्होंने विधानसभा समिति को गलत जानकारी देने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 10 जनवरी 2026 को समिति को बताया गया कि कोडरमा की एक सड़क का काम शुरू नहीं हुआ है, जबकि वह सड़क दिसंबर 2025 में ही बिना शिलान्यास के बना दी गई थी. उन्होंने संबंधित अधिकारियों पर जांच और कार्रवाई की मांग की.

 

मनरेगा के नाम को लेकर चल रही बहस पर उन्होंने कहा कि राम नाम से परहेज क्यों किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि गांधी जी की समाधि पर भी हे राम लिखा है और राम का नाम लेने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए और अगर आपत्ति है तो मिटा दे नाम समाधि से.

 

कोडरमा विधायक ने DMFT फंड के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए. आरोप लगाया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के बजाय अधिकतर फंड शहरी इलाकों में खर्च किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कोडरमा में इंजीनियरिंग कोचिंग के नाम पर एक निजी कंपनी को 1 करोड़ 88 लाख रुपये दिए गए, लेकिन परिणाम नहीं मिले.

 

इसके अलावा स्कूलों में थाली और ग्लास खरीदने के लिए 78 लाख रुपये खर्च किए जाने पर भी सवाल उठाया गया. उन्होंने कोडरमा जिले के चंदवारा, डोमचांच और सतगावां प्रखंड के जंगलों में बाहरी लोगों को बसाने का भी आरोप लगाया.

 

कहा कि हजारों लोगों को जंगलों में बसाकर उनके आधार और वोटर कार्ड बनाए जा रहे हैं और वन पट्टा दिया जा रहा है. यह भी कहा कि इससे स्थानीय लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और इस मामले में तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए.

 

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