Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

झारखंड में अब सांप काटे या कुत्ता, सरकारी अस्पतालों में नहीं होगी दवा की कमी

Ranchi: झारखंड सरकार ने इस बार बजट के साथ-साथ एक और काम किया है जो सीधे आम मरीज से जुड़ता है. राज्य के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत एक पुरानी शिकायत रही है. कभी एंटी-स्नेक वेनम नहीं, कभी एंटी-रेबीज इंजेक्शन गायब. इस बार स्वास्थ्य विभाग ने 67 करोड़ 37 लाख रुपये के बजट के साथ दवा खरीद के लिए सख्त निर्देश भी जारी किए हैं.
Advertisement
Advertisement

Ranchi: झारखंड सरकार ने इस बार बजट के साथ-साथ एक और काम किया है जो सीधे आम मरीज से जुड़ता है. राज्य के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत एक पुरानी शिकायत रही है. कभी एंटी-स्नेक वेनम नहीं, कभी एंटी-रेबीज इंजेक्शन गायब. इस बार स्वास्थ्य विभाग ने 67 करोड़ 37 लाख रुपये के बजट के साथ दवा खरीद के लिए सख्त निर्देश भी जारी किए हैं.

 

जानलेवा इलाज की दवाएं पहली प्राथमिकता


विभाग ने साफ कहा है कि सांप और कुत्ते के काटने के इलाज के लिए जरूरी दवाओं की उपलब्धता हर अस्पताल में सुनिश्चित करनी होगी. झारखंड जैसे राज्य में जहां जंगल और ग्रामीण इलाके बड़े हैं, वहां सर्पदंश और कुत्ते के काटने के मामले आम हैं. समय पर दवा न मिलने से कई बार मौत तक हो जाती है.

 

मौसम बदलने से पहले भरना होगा स्टॉक


आने वाले चार महीनों को देखते हुए मौसमी बीमारियों की दवाओं की खरीद को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं. बारिश के मौसम में मलेरिया, डेंगू और डायरिया जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं. सरकार चाहती है कि इस बार मौसम बदलने से पहले ही अस्पतालों में दवाओं का पर्याप्त भंडार तैयार हो.

 

एक्सपायरी दवाओं पर लगेगी लगाम


दवा खरीद में एक अहम शर्त यह भी जोड़ी गई है कि खरीदी जाने वाली किसी भी दवा की शेल्फ लाइफ कम से कम 80 फीसदी बची होनी चाहिए. यानी जो दवाएं जल्द एक्सपायर होने वाली हों, उन्हें खरीदा ही नहीं जा सकेगा. इससे पहले कई बार ऐसी शिकायतें आती थीं कि अस्पतालों में एक्सपायर्ड या एक्सपायर होने वाली दवाएं रखी मिलती थीं.

 

अनिवार्य दवा सूची से बाहर नहीं जा सकेंगे


सभी अस्पतालों को सरकार की अनिवार्य दवा सूची यानी एसेंशियल ड्रग लिस्ट के दायरे में रहकर ही दवाएं खरीदनी और रखनी होंगी. मनमाने तरीके से दवाएं खरीदने की गुंजाइश अब नहीं रहेगी.

 

सिविल सर्जन करेंगे निगरानी

 

दवाओं की उपलब्धता की जिम्मेदारी सिविल सर्जनों को सौंपी गई है. उन्हें अपने जिले के अस्पतालों की नियमित निगरानी करते हुए रिपोर्ट सीधे निदेशालय को भेजनी होगी. खर्च का हिसाब संबंधित पदाधिकारियों को देना होगा.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही