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तकनीकी विकास में मानवीय मूल्यों का समावेश जरूरीः कैलाश सत्यार्थी

IIT-ISM धनबाद में नोबेल पुरस्कार विजेता का प्रेरक संबोधन


Dhanbad : आईआईटी-आईएसएम, धनबाद में शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शनिवार को एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. संस्थान में अभिनाश चंद्र व बिनापानी सिन्हा मेमोरियल लेक्चर सीरीज के तहत आयोजित इस प्रथम शताब्दी व्याख्यान में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी बतौर मुख्य वक्ता शरीक हुए. उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास में मानवीय मूल्यों का समावेश जरूरी है. इससे देश के साथ-साथ आमजनता का भी विकास होगा.


आईआईटी-आईएसएम के इतिहास में ऐसा पहली बार था जब किसी नोबेल पुरस्कार विजेता ने परिसर में संबोधन दिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने की, जबकि संचालन कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन की डीन प्रो. रजनी सिंह ने किया. यह व्याख्यान श्रृंखला संस्थान के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र मिहिर सिन्हा (1966 बैच) के  माता-पिता की स्मृति में शुरू की गई है. इसका उद्देश्य विज्ञान, तकनीक और मानविकी के बीच संवाद को मजबूत करना और शिक्षा को समाज से जोड़ना है.

 


अपने संबोधन में कैलाश सत्यार्थी ने कम्पैशन क्वोशेंट (CQ) की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि करुणा केवल भावना नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की सशक्त शक्ति है. प्रत्येक व्यक्ति को दूसरों के दुख को अपना समझकर कार्य करना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ती सामाजिक उदासीनता एक गंभीर चुनौती है. इसे करुणा के माध्यम से ही दूर किया जा सकता है.


तकनीक के संदर्भ में उन्होंने कम्पैशनेट एआई की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यदि तकनीकी विकास में मानवीय मूल्यों का समावेश नहीं होगा तो वह अधूरा रह जाएगा. उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि अपने ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को जोड़ते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएं.


अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि वास्तविक शांति तभी संभव है जब विज्ञान और तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के लिए किया जाए. उन्होंने मिहिर सिन्हा के योगदान की सराहना करते हुए उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की. प्रो. रजनी सिंह द्वारा पढ़े गए संदेश में मिहिर सिन्हा ने अपनी अनुपस्थिति पर खेद व्यक्त किया. वह दुर्घटना में घायल होने के कारण अस्पताल में भर्ती हैं. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र, अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे. पेनमैन ऑडिटोरियम में प्रतिभागियों ने पूरे मनोयोग से व्याख्यान को सुना.


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