Ranchi News : केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड CUJ के जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग में तेजी से विकसित होने वाले सूखे यानी फ्लैश ड्रॉट की निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी के लिए वेब आधारित पोर्टल इंडिया फ्लैश ड्रॉट मॉनिटर (IFDM) विकसित किया गया है. इसे विभाग के डॉ. शांति स्वरूप महतो ने विकसित किया है.
फ्लैश ड्रॉट सामान्य सूखे की तुलना में बहुत तेजी से विकसित होता है. कई बार कुछ ही सप्ताह में मिट्टी की नमी तेजी से कम होने लगती है और फसलों पर जल तनाव बढ़ जाता है. इसका असर कृषि, जल उपलब्धता और किसानों की आजीविका पर पड़ सकता है. ऐसे में समय रहते इसकी पहचान और जानकारी उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है.
पोर्टल में नासा के SMAP उपग्रह से प्राप्त मिट्टी की नमी संबंधी जानकारी और ECMWF के मौसम पूर्वानुमान का उपयोग किया गया है. इनके आधार पर देश के अलग-अलग क्षेत्रों में मिट्टी की नमी में होने वाले बदलावों की निगरानी कर संभावित फ्लैश ड्रॉट की पहचान की जाती है.
पोर्टल की खासियत यह है कि इसमें जिला स्तर पर सूखे की निगरानी की सुविधा दी गई है. उपयोगकर्ता किसी जिले या राज्य का चयन कर वहां की वर्तमान स्थिति देख सकते हैं. सूखे की गंभीरता को D0 से D4 तक की श्रेणियों में प्रदर्शित किया गया है, जिससे सामान्य स्थिति से लेकर बढ़ते जल तनाव तक को समझना आसान होता है.
पोर्टल पर करीब 15 दिनों तक की संभावित प्रारंभिक चेतावनी संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है. इसके अलावा किसी क्षेत्र में सूखे से प्रभावित क्षेत्रफल और समय के साथ सूखे की गंभीरता में हुए बदलाव को भी देखा जा सकता है. फ्लैश ड्रॉट की प्रक्रिया को Development, Propagation और Recovery यानी विकास, प्रसार और पुनर्प्राप्ति के तीन चरणों में समझने की सुविधा भी दी गई है.
डॉ. शांति स्वरूप महतो के अनुसार, पोर्टल का उद्देश्य केवल वैज्ञानिक विश्लेषण तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक जानकारी को सरल तरीके से आम लोगों तक पहुंचाना भी है. तेजी से विकसित होने वाले सूखे की समय पर पहचान कृषि और जल संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है. इसी उद्देश्य से उपग्रह और मौसम पूर्वानुमान से प्राप्त जानकारी को सरल जिला-स्तरीय प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत किया गया है.
उन्होंने बताया कि पोर्टल अभी विकास के चरण में है. वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से मिलने वाले सुझावों के आधार पर इसमें आगे और सुधार किया जाएगा. भविष्य में यह प्लेटफॉर्म भारत में फ्लैश ड्रॉट को समझने, उसकी निगरानी करने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने में उपयोगी हो सकता है.
डॉ. महतो ने केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बिकाश रंजन परिडा और विभाग के सभी सहकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने इस कार्य के दौरान मिले प्रोत्साहन और सहयोग के लिए सभी का धन्यवाद किया.
साथ ही वैज्ञानिक अनुप्रयोगों के विकास में सहयोग देने वाले व्यापक वैज्ञानिक एवं तकनीकी समुदाय के प्रति भी आभार जताया.

