Ranchi News: नामकुम अंचल में जमीन के म्यूटेशन से जुड़े दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ और महत्वपूर्ण कागजात गायब होने के मामले में ACB की जांच में कई अहम बातें सामने आई हैं. झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद ACB ने नामकुम अंचल की तत्कालीन CO डॉ. श्वेता वर्मा, तत्कालीन CI मनोज कुमार दीक्षित और तत्कालीन लिपिक दीपक कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. मामले में मनोज कुमार दीक्षित और दीपक कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि श्वेता वर्मा की गिरफ्तारी के लिए ACB लगातार छापेमारी कर रही है.
जांच के दौरान ACB को जानकारी मिली कि श्वेता वर्मा रांची में भविष्य निधि कार्यालय में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर तैनात थीं. कुछ दिन पहले उनका तबादला राजस्व विभाग में ADM रैंक के पद पर किया गया था. हालांकि जानकारी के मुताबिक, उन्होंने अब तक राजस्व विभाग में अपना पदभार ग्रहण नहीं किया है. बताया जा रहा है कि वह 4 मई 2026 से कार्यालय नहीं आ रही हैं. इसके बाद से ACB उनकी तलाश में जुटी है.
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इधर गिरफ्तार तत्कालीन CI मनोज कुमार दीक्षित और लिपिक दीपक कुमार से ACB ने पूछताछ की है. पूछताछ में दोनों से यह जानने की कोशिश की गई कि श्वेता वर्मा कहां हैं और जमीन से जुड़े कौन कौन फर्जीवाड़ा किया है और दस्तावेज आखिर किसकी मौजूदगी में गायब हुए हैं. दोनों आरोपी इन सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं दे सके.
पूछताछ में दोनों ने ACB को बताया कि संबंधित फाइल और कागजात कर्मचारी महली के पास थे और वहीं से फाइल गायब हुई. हालांकि कर्मचारी महली की मौत हो चुकी है. ऐसे में ACB आरोपियों के इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई है.
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फाइल महली के पास कैसे पहुंची, उसके बाद दस्तावेज कैसे गायब हुए और पूरे मामले में तत्कालीन CO श्वेता वर्मा की क्या भूमिका रही.
ACB गिरफ्तार दोनों आरोपियों को दोबारा रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है. रिमांड के दौरान श्वेता वर्मा की भूमिका, गायब फाइल और जमीन के रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ को लेकर दोनों से फिर सवाल किए जाएंगे. वहीं श्वेता वर्मा की गिरफ्तारी के लिए ACB की छापेमारी जारी है.
मामला नामकुम अंचल कार्यालय में दर्ज दाखिल-खारिज वाद संख्या 356R-27/2013-14 से जुड़ा है. दस्तावेज गायब होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर ACB थाना रांची में कांड संख्या 18/2026 दर्ज किया गया था. प्राथमिकी 26 अगस्त 2026 को दर्ज हुई. जांच के दौरान तत्कालीन सीओ डॉ. श्वेता वर्मा, तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और तत्कालीन लिपिक दीपक कुमार की भूमिका की जांच की गई.
जांच में साक्ष्य मिलने के बाद 22 सितंबर को ACB ने मनोज कुमार दीक्षित और दीपक कुमार को गिरफ्तार किया. मनोज कुमार दीक्षित की उम्र करीब 65 वर्ष और दीपक कुमार की उम्र करीब 51 वर्ष बताई गई है. दोनों को जेल भेज दिया गया है.
1.22 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आरोप
मामला धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित खाता नंबर 32 के प्लॉट नंबर 776, 820, 821 और 822 से जुड़ी करीब 1.22 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड से भी जुड़ा है. आरोप है कि अंचल स्तर पर रिकॉर्ड में हेरफेर कर प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम जमाबंदी कायम कर दी गई. शिकायत में करीब दो एकड़ जमीन के म्यूटेशन और डिमांड खोले जाने को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं.
शिकायत के अनुसार, परिवादी की मां ने तीन अलग-अलग पंजीकृत विक्रय विलेखों के माध्यम से कुल 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी. इसका पंजीकरण संख्या 23R/1978-79 बताया गया है. मां की मृत्यु के बाद परिवार में बंटवारा हुआ और परिवादी ने खुद को जमीन का वैध उत्तराधिकारी बताया.
17 अगस्त 2016 को परिवादी को अंचल कार्यालय की ओर से दोहरी जमाबंदी को लेकर नोटिस मिला. इसके बाद अंचल कार्यालय पहुंचने पर पता चला कि संबंधित जमीन के एक हिस्से पर प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से नई जमाबंदी कायम कर दी गई है.
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