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भारत में व्यवस्था से ज्यादा विविधता व अनिश्चित माहौल है...पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंदिरा नूई के बयान पर छिड़ी बहस

  • भारत अभी भी विश्व शक्ति बनने के लिए संघर्ष कर रहा है, क्योंकि यहां लोकतंत्र है...

Lagatar Desk :  भारत में जन्मीं पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंदिरा नूई का एक पुराना इंटरव्यू सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इंटरव्यू में उन्होंने भारत को लेकर कुछ टिप्पणियां की है, जिसने भारत की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. जहां कुछ लोग उनकी बातों को वास्तविकता से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं कई यूजर्स उनके बयान पर असहमति भी जता रहे हैं.

 

इंटरव्यू में इंदिरा नूई ने भारत, चीन और अमेरिका की तुलना करते हुए कहा कि भारत अपनी विविधता और अनिश्चित माहौल के लिए जाना जाता है. उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को पूरी तरह साफ-सुथरा और व्यवस्थित वातावरण पसंद है, तो भारत उसके लिए आसान जगह नहीं हो सकता.

 

 

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग भारत की इस अलग पहचान और ऊर्जा को समझ लेते हैं, वे बार-बार यहां आना पसंद करते हैं और भारत उनके लिए एक खास अनुभव बन जाता है. नूई ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी पहचान उसकी विविधता और अलग-अलग संस्कृतियां हैं. उनका मानना है कि यहां हर क्षेत्र, हर शहर और हर समुदाय का अपना अलग रंग है, जो इसे बाकी देशों से अलग बनाता है.

 

भारत की तुलना में उन्होंने चीन को अधिक व्यवस्थित देश बताया. उनके मुताबिक चीन में एक जैसी व्यवस्था और केंद्रीय स्तर पर फैसले लेने की वजह से विकास की रफ्तार तेज रही. उन्होंने कहा कि चीन ने योजनाबद्ध तरीके से खुद को वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया, जबकि भारत लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ा है. हालांकि उन्होंने यह भी साफ कहा कि उन्हें खुशी है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है.

 

इंटरव्यू के दौरान इंदिरा नूई ने अमेरिका की मेरिट आधारित व्यवस्था की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि अमेरिका में प्रतिभा को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है और इसी वजह से उन्हें वहां अपनी क्षमता के दम पर आगे बढ़ने का अवसर मिला. उनका कहना था कि उन्हें नहीं लगता कि किसी दूसरे देश, यहां तक कि भारत में भी, वह उसी तरह एक बड़ी वैश्विक कंपनी की सीईओ बन पातीं.

 

बता दें कि इंदिरा नूई का जन्म 28 अक्टूबर 1955 को चेन्नई में हुआ था. उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) कोलकाता से पढ़ाई की और 2006 से 2018 तक पेप्सिको की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहीं. उन्हें दुनिया की सबसे प्रभावशाली कारोबारी महिलाओं में गिना जाता है.

 

 

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