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युद्ध के समय में भारत को एक प्रमुख शांतिदूत के रूप में देखा जा रहा है : मोहन भागवत

उन्होंने कहा कि भारत का शाश्वत ज्ञान वसुधैव कुटुंबकम (दुनिया एक परिवार है) पर आधारित है. स्वार्थ तथा वर्चस्व की इच्छा ही वर्तमान संघर्षों का मूल कारण है. मोहन भागवत महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे.
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Nagpur : अमेरिका-इजरायल-ईरान वार के संदर्भ में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दावा किया कि दुनिया के कई देश अब यह मान रहे हैं कि केवल भारत ही चल रहे युद्धों को समाप्त कराकर वैश्विक शांति ला सकता है. 


उन्होंने कहा कि भारत का शाश्वत ज्ञान वसुधैव कुटुंबकम (दुनिया एक परिवार है) पर आधारित है. स्वार्थ तथा वर्चस्व की इच्छा ही वर्तमान संघर्षों का मूल कारण है. मोहन भागवत महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे.


श्री भागवत के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को एक प्रमुख शांतिदूत के रूप में देखा जा रहा है. वैश्विक शांति में भारत की भूमिका अहम है.  कहा कि युद्ध स्वार्थ का परिणाम हैं और दुनिया को संघर्ष के बजाय सद्भाव की आवश्यकता है. संघर्ष का यही कारण है.


आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति एकता और भाईचारे पर जोर देती है, जो दुनिया को राह दिखा सकती है.  मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत, पश्चिम एशिया सहित अन्य वैश्विक संकटों के बीच एक तटस्थ और मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए सुर्खियों में है.

   

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