Riyadh : मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण खाड़ी के देश हलकान हैं. ईरान ने शुरुआत में इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों, सहित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर मिसाइल हमले किये. अब ईरान ने टारगेट बदल दिया है. ईरान इन देशों के तेल-गैस फील्ड पर हमले कर रहा है.
इस कारण पूरे विश्व में तेल-गैस की सप्लाई चेन पर असर पड़ा है. खाडी देशों को अर्थव्यस्था चौपट हो गयी है. इजरायल द्वारा ईरान के सबसे बड़े पार्स गैस फील्ड पर किये गये हमले के बाद परिस्थितियां भयावह हो गयी है,बता दें कि साउथ पार्स दुनिया की सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस फील्ड माना जाता है. इस हमले से ईरान आग बबूला हो गया.
Ballistic missiles struck Saudi Arabia’s Riyadh refinery on Wednesday, a key facility supplying the capital’s fuel market, a Saudi official told WSJ. pic.twitter.com/EkQg7pMEKA
— Polymarket Intel (@PolymarketIntel) March 19, 2026
ईरान ने आज गुरुवार को फिर खाड़ी देशों के तेल और गैस रिफाइनरी पर भीषण हमला किया है. खबर है कि ईरान ने कुवैत की मीना अब्दुल्लाह रिफाइनरी पर मिसाइलें दागी है. हमले के बाद प्लांट में आग लग गयी है. कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने बताया कि रिफाइनरी की एक ऑपरेशनल यूनिट को ड्रोन ने निशाना बनाया है.
बता दें कि इससे पहले ईरान ने कुवैत की एक अन्य रिफाइनरी मीना अल-अहमदी पर हमला किया. सूत्रों के अनुसार यह मध्य पूर्व की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में शामिल है. इसक क्षमता लगभग 730,000 बैरल प्रति दिन है. जानकारी सामने आयी है कि हमले के कारण यहां आग लग गयी थी, लेकिन आग पर काबू पा लिया गया गया है.
इसके अलावा ईरान ने लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू में स्थित तेल की दिग्गज कंपनी सऊदी अरामको की SAMREF रिफाइनरी पर मिसाइले दागी है.. हालांकि सऊदी अरब के अनुसार हमले का कोई असर नहीं हुआ है.
कहा जा रहा है कि यह हमला ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में किया गया है. अहम बात यह है कि ईरान ने कतर, यूएई सहित सऊदी अरब, कुवैत, कतर पर तेल-गैस के ठिकानों पर हमले की चेतावनी दी है.
खबर है कि समस्या से निजात पाने के लिए कल 18 मार्च को सऊदी अरब, सीरिया कतर, अजरबैजान, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, बहरीन, मिस्र, पाकिस्तान, तुर्किये सहित यूएई के विदेश मंत्रियों ने रियाद में आपातकालीन मीटिंग की थी. इसके बाद इन देशों ने जॉइंट स्टेटमेंट कर ईरान से तुरंत अपने हमले रोकने'की मांग की है.
विदेश मंत्रियों ने कहा है कि ईरान बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से GCC देशों, जॉर्डन, अजरबैजान और तुर्किये पर जानबूझकर हमले कर रहा है. हमले रिहायशी इलाकों, तेल सुविधाओं, डिसेलिनेशन प्लांट्स, एयरपोर्ट्स, हाउसिंग कॉम्प्लेक्स और डिप्लोमैटिक मिशन्स को टारगेट कर किये जा रहे हैं. जॉइंट स्टेटमेंट में कहा गया है कि ईरान के हमले किसी भी हाल में जायज नहीं ठहराये जा सकते.हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया गया है.
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कहा कि उनका पहला लक्ष्य खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों को रोकना है. कहा कि वे चाहते हैं कि उनके देश और पड़ोसी देशों पर हमले बंद हों. उन्होंने साफ किया कि हम सभी देश इस संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं.
हालांकि,उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर उकसाया गया, तो सऊदी अरब के पास ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है. प्रिंस फैसल ने आरोप लगाया कि ईरान अपने पड़ोसियों से बात करने में यकीन नहीं रखता. दबाव बनाने की कोशिश करता है. कहा कि ईरान पर जो थोड़ा-बहुत भरोसा बचा था, वह अब पूरी तरह खत्म हो चुका है.
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