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भारत केवल भूभाग नहीं, बल्कि ज्ञान की प्राचीन परंपराओं की जीवंत भूमि: अर्चना दुबे

रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग में पीएचडी कोर्स वर्क के अंतर्गत व्याख्यान का आयोजन हुआ. मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अर्चना कुमारी दुबे ने मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुई. कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश नन्द तिवारी, पीएचडी कोऑर्डिनेटर डॉ. मनोज कच्छप, नामांकन प्रभारी डॉ. बीरेंद्र कुमार महतो एवं डॉ. रीझू नायक मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे.
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  • रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग में पीएचडी कोर्स वर्क व्याख्यान संपन्न

Ranchi: रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग में पीएचडी कोर्स वर्क के अंतर्गत व्याख्यान का आयोजन हुआ. मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अर्चना कुमारी दुबे ने मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुई. कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश नन्द तिवारी, पीएचडी कोऑर्डिनेटर डॉ. मनोज कच्छप, नामांकन प्रभारी डॉ. बीरेंद्र कुमार महतो एवं डॉ. रीझू नायक मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे. 

 

इस दौरान प्रो. अर्चना कुमारी दुबे ने भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल अवधारणाओं को विस्तार से प्रस्तुत की और कहा कि भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि ज्ञान की प्राचीन एवं समृद्ध परंपराओं की जीवंत भूमि है. इसके साथ ही उन्होंने ज्ञान की उत्पत्ति, उसकी साधना और उसके नैतिक आधारों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि ज्ञान की प्राप्ति के लिए व्यक्ति का आरोग्यवान होना जरूरी है.

 

इसके साथ ही दूरदर्शी, दोषमुक्त और दयालु होना आवश्यक है. प्रो. दुबे ने कहा कि शोध केवल अकादमिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम है. शोधकर्ता को अपने कार्य को सामाजिक दृष्टि से उपयोगी बनाना चाहिए, ताकि उसका शोध समाज के लिए क्रांतिकारी सिद्ध हो सके.

 

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रकृति के प्रत्येक तत्व, नदियां, वृक्ष, पर्वत, घर-द्वार ज्ञान के संवाहक माने गए हैं. वर्तमान समय में प्रगति के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है.

 

उन्होंने विद्यार्थियों को विनम्रता, सरलता और वाणी की कोमलता को आत्मसात करने की सलाह दी, साथ ही अभिमान से दूर रहने की सीख भी दी. इस अवसर पर विभाग के शोधार्थीगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

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