Jamshedpur : इजराइल, अमेरिका व ईरान के बीच जारी तनाव के कारण दुनिया भर में एलपीजी व प्रोपेन गैस का संकट हो गया है. इसका असर औद्योगिक उत्पादन पर भी पड़ा है. इस स्थिति से निपटने के लिए टाटा स्टील ने अपने कुछ प्रमुख डाउनस्ट्रीम प्लांट में नई तकनीक अपनाई है.
कंपनी ने सीआरएम बारा, ट्यूब्स डिवीजन, टिनप्लेट व वायर डिवीजन में हाइड्रोजन और नाइट्रोजन के मिश्रण यानी HNX का उपयोग कर उत्पदन की शुरुआत की है. कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट उज्जवल चक्रवर्ती के अनुसार, गैस की कमी को देखते हुए अप्रैल में शटडाउन लेकर सिस्टम को अपग्रेड किया गया, ताकि उत्पादन प्रभावित न हो.
इस नई व्यवस्था से कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी. अब फर्नेस में अमोनिया क्रैकिंग सिस्टम की बजाय सीधे हाइड्रोजन व नाइट्रोजन का उपयोग किया जा रहा है, जिससे स्टील की गुणवत्ता बेहतर रहती है और ऑक्सीकरण भी कम होता है. कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2045 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करना है और यह कदम उसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
प्रोपेन की कमी को देखते हुए मीरामंडली प्लांट में कोक ओवन गैस के उपयोग की तैयारी भी की जा रही है. इससे उत्पादन प्रक्रिया को जारी रखने में मदद मिलेगी. वहीं, सुरक्षा को लेकर कंपनी प्रबंधन ने चिंता जताई है. सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन ने सोमवार को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में बताया कि अप्रैल महीने में जमशेदपुर, कलिंगानगर और मीरामंडली यूनिट्स में 12 लोस्ट टाइम इंज्यूरी के मामले सामने आए हैं. उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया कि उत्पादन के साथ सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए.
चुनौतियों के बीच कंपनी के कई विभागों ने बेहतर प्रदर्शन भी किया है. जमशेदपुर के एलडी-1 और एलडी-3 प्लांट ने हॉट मेटल उत्पादन में नए रिकॉर्ड बनाए हैं. रॉ मटेरियल डिवीजन ने भी तय लक्ष्य से बेहतर काम किया है और ओडिशा के कलामंग कोल ग्रीन फील्ड माइंस से उत्पादन शुरू हो चुका है. इसके अलावा महाराष्ट्र के खपोली प्लांट में सौर ऊर्जा के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है.
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