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रांची में खनन क्षेत्र में श्रमिक सुरक्षा व बाल श्रम पर अंतरराष्ट्रीय गोलमेज चर्चा

झारखंड में खनन क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों की सुरक्षा, श्रम अधिकार और बाल श्रम की समस्या पर आज रांची में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय गोलमेज चर्चा आयोजित की गई
 

Ranchi : झारखंड में खनन क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों की सुरक्षा, श्रम अधिकार और बाल श्रम की समस्या पर आज रांची में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय गोलमेज चर्चा आयोजित की गई. इस बैठक का आयोजन अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO), जापान–मुक्ति द्विपक्षीय कार्यक्रम और बाल कल्याण संघ (BKS) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया.

 

बैठक में जापान सरकार के प्रतिनिधि अकीरा योशिदा, युसुके सुजिकावा और मात्सुयामा, ILO इंडिया की निदेशक मिचिको मियामोटो, ILO के तकनीकी सलाहकार जियोवानी सोलेदाद तथा बाल कल्याण संघ के संस्थापक सचिव संजय कुमार मिश्रा सहित खनन क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए.

 

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स्वागत भाषण में संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां का खनन क्षेत्र हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है. इसलिए श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण, श्रम अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि माइका खनन क्षेत्रों में बाल श्रम एक गंभीर चुनौती रही है, हालांकि हाल के वर्षों में इस दिशा में सकारात्मक प्रगति भी हुई है.

 

चर्चा के दौरान बताया गया कि झारखंड देश के लगभग 40 प्रतिशत खनिज भंडार का मालिक है और यदि खनन क्षेत्र को व्यवस्थित व पारदर्शी ढंग से विकसित किया जाए तो यह राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार का बड़ा स्रोत बन सकता है. हालांकि विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि खनन अभी भी जोखिमपूर्ण और काफी हद तक असंगठित क्षेत्र है, जहां कई जगह श्रमिक असुरक्षित परिस्थितियों में काम करते हैं.

 

तकनीकी सत्र में टेर्रे डेस होम्स नीदरलैंड्स के डॉ. पी. थंगम ने झारखंड के खनन क्षेत्र में ‘डिसेंट वर्क’ की स्थिति और नीतिगत चुनौतियों पर प्रस्तुति दी. वहीं राजस्थान के अरावली क्षेत्र के कार्यक्रम निदेशक वरुण शर्मा और डॉ. विजय जैन ने अपने अनुभव साझा किए.

 

बैठक में खनिजों की नैतिक आपूर्ति श्रृंखला (Ethical Supply Chain) को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि खनिजों का उत्पादन बिना बाल श्रम और शोषण के सुरक्षित परिस्थितियों में हो. अंत में प्रतिभागियों ने झारखंड के खनन क्षेत्र को सुरक्षित, पारदर्शी और श्रमिकों के लिए सम्मानजनक रोजगार वाला क्षेत्र बनाने के लिए संयुक्त प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई.

 

 


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