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सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में ‘गोपनीयता' के खिलाफ हाईकोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर

  • चयन प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट में आज अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता विशाल कुमार द्वारा एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप याचिका (I.A.) दायर की गई. यह याचिका राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की चयन प्रक्रिया में बरती जा रही कथित - गोपनीयता को चुनौती देने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दाखिल की गई है.

 

दरअसल, याचिका में उल्लेख किया गया है कि इससे संबंधित एक जनहित याचिका में हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने 25 मार्च, 2026 को बैठक की और कुछ नामों की अनुशंसा की है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि चयन समिति ने आवेदकों की सूची, शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के नाम और चयन के आधार (Grounds of Selection) को सार्वजनिक नहीं किया है.

 

यह अंजलि भारद्वाज बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के उन स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन है, जिसमें चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और विवरण वेबसाइट पर डालने का आदेश दिया गया था.

 

याचिका में RTI अधिनियम की धारा 15 (6) का हवाला देते हुए कहा गया है कि सूचना आयुक्त का किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होना वर्जित है. पारदर्शिता के अभाव में यह जांचना असंभव है कि अनुशंसित उम्मीदवार इस वैधानिक अयोग्यता (Disqualification) की परिधि में तो नहीं आते.

 

याचिका में क्या है आग्रह 

याचिका में कहा गया है कि चयन समिति की कार्यवाही के मिनट्स (Minutes of Meeting) और आवेदकों के विवरण को तुरंत सार्वजनिक किया जाए. 25 मार्च, 2026 को की गई अनुशंसाओं के आधार पर तब तक कोई नियुक्ति न की जाए, जब तक कि प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित न हो जाए. पारदर्शिता के बिना की गई चयन प्रक्रिया को अवैध घोषित किया जाए.

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