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चाईबासा सदर अस्पताल मामले में जांच पूरी, HIV संक्रमण का स्रोत ब्लड बैंक नहीं

Ranchi: हाल ही में चाईबासा सदर अस्पताल में एचआईवी पॉजिटिव का मामला सामने आया था. जिसमें एक ही परिवार के तीन सदस्य एचआईवी संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी. जिसके बाद जांच टीम बनाई गई थी. जांच टीम की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. झारखंड स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि एक परिवार के तीन सदस्यों में पाए गए एचआईवी संक्रमण का स्रोत चाईबासा सदर अस्पताल का ब्लड बैंक नहीं था. यह जानकारी गुरुवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी.

 

झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक-प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ सान्याल ने बताया कि दो सदस्यीय जांच टीम ने इस आरोप की गहन जांच की कि एक महिला, उनके पति और उनके बड़े बच्चे में एचआईवी संक्रमण चाईबासा सदर अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के दौरान चढ़ाए गए रक्त के कारण हुआ या नहीं. जांच दल का नेतृत्व स्वास्थ्य सेवा उप निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार सिन्हा ने किया.

 

डॉ. सान्याल के अनुसार, पति ने इस महीने की शुरुआत में मीडिया में बयान देकर आरोप लगाया था कि वर्ष 2023 में चाईबासा सदर अस्पताल में सी-सेक्शन के दौरान उनकी पत्नी को खून चढ़ाया गया था, जिसके बाद पूरा परिवार एचआईवी संक्रमित पाया गया. यह मामला तब सामने आया, जब जून 2025 में महिला दूसरी बार गर्भवती हुईं और नियमित जांच के दौरान उनमें एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई. इसके बाद पति की जांच की गई, जिसमें वह भी एचआईवी संक्रमित पाए गए. दो जनवरी को उनका बड़ा बच्चा बीमार पड़ा और जांच में उसमें भी एचआईवी संक्रमण पाया गया.

 

डॉ. सान्याल ने बताया कि जांच टीम ने चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक के सभी रिकॉर्ड की जांच की. इसमें पाया गया कि महिला को एक ही रक्तदाता से एक यूनिट खून चढ़ाया गया था, जबकि दूसरी यूनिट सिजेरियन प्रक्रिया के दौरान उपयोग में नहीं लाई गई. जांच के दौरान पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ निवासी उस रक्तदाता के नमूने का पता लगाया गया, जो एचआईवी नेगेटिव पाया गया. 

 

स्वास्थ्य विभाग ने निष्कर्ष निकाला है कि वर्ष 2023 में एचआईवी संक्रमण का स्रोत चाईबासा सदर अस्पताल का ब्लड बैंक नहीं था.

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