- मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति पर सरकार देगी जवाब
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने एक कार्यपालक अभियंता पर लगे गंभीर आरोप की जांच दो साल से अधिक समय बीतने के बाद भी पूरी न होने पर गहरी चिंता जताई है. मामला जमशेदपुर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता राजेश रजक पर अपने भाई को ठेका दिलाने के आरोप से जुड़ा है.
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अखिल कुमार की खंडपीठ बीरेंद्र सिंह की LPA अपील पर सुनवाई कर रही थी. सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया. इसमें बताया गया कि आरोपों के आधार पर कार्यपालक अभियंता के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गई थी और फॉर्म-के (आरोप ज्ञापन) जारी हुआ था, लेकिन इसमें उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया.
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इसके बाद वर्ष 2024 में उपविकास आयुक्त, जमशेदपुर ने आदेश (ज्ञापांक 153/गो, दिनांक 08.07.2024) के जरिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की. इसमें विशेष पदाधिकारी, प्रमंडल जमशेदपुर, कार्यकारी दंडाधिकारी (धालभूम) डेविड बालिहार और पथ निर्माण विभाग, जमशेदपुर के कार्यपालक अभियंता शामिल हैं. समिति की जांच अब तक पूरी नहीं हुई है.
खंडपीठ ने कहा कि इतने गंभीर आरोप के बावजूद जांच समिति बनने के दो वर्ष से अधिक बीत जाने पर भी जांच का निष्कर्ष तक न पहुंचना अदालत के लिए चिंता का विषय है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि भाई को कथित रूप से दिए गए ठेके से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड अगली सुनवाई पर पेश किया जाए.
वहीं मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के मुद्दे पर महाधिवक्ता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वे अगली सुनवाई तक इस पर सकारात्मक जवाब के साथ आएंगे. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार ने पक्ष रखा.
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