Hazaribagh News : हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल के अधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायत पर वन विभाग ने जांच रिपोर्ट फिर तलब की है. राज्यपाल सचिवालय और भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पत्रों के संदर्भ में वन विभाग के विशेष सचिव राजदीप संजय लाल जॉन ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ), झारखंड को रिमाइंडर भेजा है. इसमें मुख्य वन संरक्षक (निगरानी) से जांच कराकर जल्द रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है.
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यह शिकायत हजारीबाग के तत्कालीन क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक आर.एन. मिश्रा, वन संरक्षक ममता प्रियदर्शी और हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल के डीएफओ मौन प्रकाश के खिलाफ है. सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक अविनाश कुमार परमार ने इन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
एक साल से रिपोर्ट लंबित होने का आरोप
विशेष सचिव के पत्र के अनुसार, विभाग ने पहले मुख्य वन संरक्षक (निगरानी), झारखंड से जांच कराकर मंतव्य सहित रिपोर्ट मांगी थी. लेकिन प्रतिवेदन अब तक विभाग को नहीं मिला है. इसी कारण दोबारा पत्र जारी कर जांच रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है. पत्र की प्रतिलिपि शिकायतकर्ता अविनाश कुमार परमार को भी भेजी गई है.
जांच रिपोर्ट दबाने का आरोप
परमार की शिकायत के अनुसार, हजारीबाग के तत्कालीन वन संरक्षक कार्यालय की ओर से गठित दो सदस्यीय जांच समिति ने अंतरिम रिपोर्ट सौंपी थी. उनका आरोप है कि तत्कालीन वन संरक्षक ममता प्रियदर्शी ने करीब पांच महीने तक रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं की.
शिकायत में तत्कालीन क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक आर.एन. मिश्रा की ओर से 23 जुलाई 2025 को जारी पत्र का भी उल्लेख है. परमार का दावा है कि इस पत्र में जांच रिपोर्ट पर कथित नाराजगी जताते हुए जांच करने वाले दोनों सहायक वन संरक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया था और उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया था.
परमार के अनुसार, पीसीसीएफ की ओर से वन विभाग के सचिव को भेजे गए पत्र में यह स्पष्ट किया गया था कि जांच प्रतिवेदन पर आपत्ति आर.एन. मिश्रा ने अपने स्तर से जताई थी. शिकायतकर्ता ने इस कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए सवाल उठाए हैं. हालांकि, संबंधित पत्रों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है.
डीएफओ की भूमिका पर भी सवाल
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जिस डीएफओ मौन प्रकाश के खिलाफ शिकायत की जांच के लिए समिति गठित की गई थी, उसी अधिकारी से जांच रिपोर्ट की समीक्षा कराई गई. परमार का दावा है कि समीक्षा के दौरान जांच अधिकारियों को ही दोषी ठहराया गया.
उन्होंने इसे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर सवाल बताया है. परमार ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राज्यपाल और भारत सरकार को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
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