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IPAC Raid मामला : SC की ममता पर कड़ी टिप्पणी, जांच में रुकावट डालना सही नहीं

  • सीआईडी या ईडी आदि कोई एजेंसी मुकदमा दायर नहीं कर सकती.
  • मुख्यमंत्री ने जांच के दौरान जबरदस्ती दखल दिया है, वह बहुत ही असामान्य है.
  • सुप्रीम कोर्ट में पांच न्यायाधीशों की पीठ गठित करनी होगी.
  • कपिल सिबल ने पीठ के समक्ष समय की मांग करते हुए याचिका दायर की.

New Delhi : पश्चिम बंगाल IPAC Raid मामले में आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारी की पीठ ने सुनवाई की, खबरों के अनुसार कोर्ट ने सीएम ममता बनर्जी के व्यवहार पर कड़ी टिप्पणी की है.

 

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा के अनुसार मुख्यमंत्री को जबरन उस जगह में घुसते देखना सुखद नहीं हो सकता, जहां केंद्रीय जांच एजेंसी(ईडी) जांच कर रही हो. कहा कि जांच एजेंसी द्वारा अगर ऐसे मामलों में अनुच्छेद 32 या अनुच्छेद 226 के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता, तो फिर क्या हो सकता है?  उन्होंने कहा, तो फिर कल कोई दूसरा मुख्यमंत्री भी यही काम कर सकता है. 
 


इस पर राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा, केंद्र सरकार इस मामले में मुकदमा दायर कर सकती है. लेकिन सीआईडी या  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) आदि कोई एजेंसी मुकदमा नहीं कर सकती. जोर देकर कहा कि यदि जांच एजंसी ऐसा करती है. तो संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत सुप्रीम कोर्ट में पांच न्यायाधीशों की पीठ गठित करनी होगी.

 

कोर्ट को ऐसी एजेंसियों की शक्तियों का पुनर्निर्धारण करना होगा. अहम बात यह है कि राज्य की ममता सरकार ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट से समय देने की याचना की. राज्य की ओर से पेश कपिल सिबल ने पीठ के समक्ष समय की मांग करते हुए याचिका दायर की.  

 

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की याचिका को समय बर्बाद करने की कोशिश करार दिया. कहा कि ध्यान दिया जाना चाहिए कि मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप हैं. शिकायत करते हुए कहा, जिस तरह मुख्यमंत्री ने जांच के दौरान जबरदस्ती दखल दिया है, वह बहुत ही असामान्य है.

 

कोर्ट ने राज्य की टीएमसी सरकार को याद दिलाया कि पहले ही अदालत चार सप्ताह का समय दे चुकी है. इस पर कपिल सिबल ने कहा कि  हम इस मामले में जवाब दाखिल करना चाहते हैं.सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए आश्चर्य जताया कि मुख्यमंत्री केंद्रीय एजेंसी की जांच में दखल दे रही हैं. चार सप्ताह बीत जाने के बाद भी समय मांगा जा रहा है.

 

इस पर  राज्य की ओर से पेश अन्य वकील श्याम दीवान ने दलील दी कि हमें अपना बयान जमा करने का समय नहीं मिल रहा है.  इस पर कोर्ट ने कहा कि आप समय बर्बाद करने की कोशिश कर रहे हैं.  क्योंकि चार सप्ताह का समय पहले ही कोर्ट दे चुका है.

 

जान लें कि इससे पूर्व ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर स्पष्ट कहा था कि राज्य की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल केजवानों के बीच आमने-सामने की झड़प से बचने के लिए ईडी अधिकारियों को तलाशी रोकनी पड़ी था.

 

हलफनामे में ईडी ने यह भी कहा है कि कोई भी जांच एजेंसी तलाशी के दौरान किसी तीसरे व्यक्ति को अंदर आने और सामान ले जाने की अनुमति नहीं दे सकती.पूर्व की सुनवाई में SC अपने  अंतरिम आदेश में राज्य की ममता सरकार को 8 जनवरी की घटना के सभी सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था.  

 


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