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सड़क निर्माण में गड़बड़ी: रिटायर इंजीनियर की पेंशन 10 साल तक 15 फीसदी कटेगी

झारखंड की खबरें

Ranchi: झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग ने सड़क निर्माण में भारी गड़बड़ी और सरकारी पैसे के दुरुपयोग के मामले में एक रिटायर्ड इंजीनियर पर बड़ी कार्रवाई की है. गोड्डा कार्य प्रमंडल में तैनात रहे तत्कालीन सहायक अभियंता रामाशीष राम, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, को दोषी पाया गया है. उनकी पेंशन से अगले 10 साल तक हर महीने 15 प्रतिशत रकम काटी जाएगी.

 

यह पूरा मामला गोड्डा कार्य प्रमंडल के अंतर्गत राज्य संपोषित योजना के तहत बनी छोटी लोहबंधा से दरघट्टी तक की सड़क से जुड़ा है. जब अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार ने इस सड़क की जांच की, तो निर्माण में कई गंभीर खामियां सामने आईं. सड़क बनाते समय तय मानकों और प्राक्कलन का ध्यान ही नहीं रखा गया.

 

जांच में क्या-क्या मिली गड़बड़ी

सड़क के कई हिस्सों में यानी 1105, 1111, 1329 और 1978 मीटर के चैनेज पर सड़क की चौड़ाई और मोटाई तय मानक से काफी कम पाई गई. इसके अलावा 200 मीटर के चैनेज पर पुराने पीसीसी के चौड़ीकरण में जीएसबी की मोटाई 150 मिलीमीटर होनी चाहिए थी, लेकिन वहां सिर्फ 130 मिलीमीटर ही पाई गई. सड़क के पूरे बिटुमिनस हिस्से में प्रीमिक्स कार्पेट भी बुरी तरह टूटा-फूटा मिला. जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया कि इंजीनियर ने जानबूझकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया और इसका सीधा फायदा ठेकेदार को पहुंचाया गया. इसके अलावा उनपर काम की सही निगरानी न करने का भी आरोप लगा, जो पीडब्ल्यूडी कोड की कंडिका 32 का साफ उल्लंघन माना गया.

 

इंजीनियर ने दी यह सफाई

रामाशीष राम 28 फरवरी 2021 को सेवानिवृत्त हुए थे. इसके बाद उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई को झारखंड पेंशन नियमावली के नियम 43बी के तहत बदल दिया गया. अपने बचाव में उन्होंने कहा कि सड़क पर बालू लदे भारी हाईवा वाहन चलने से सड़क का ऊपरी हिस्सा खराब हुआ था और इसकी मरम्मत बाद में ठेकेदार से करवा दी गई थी. वहीं ग्रामीण कार्य विभाग की तरफ से कुछ ऐसी रिपोर्ट भी आई थीं, जिनमें आरोपों को सही नहीं माना गया था. लेकिन विभागीय जांच पदाधिकारी ने गहराई से समीक्षा करने के बाद दोनों मुख्य आरोपों को सही पाया.

 

राज्यपाल के आदेश पर मिली सजा

झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग की संयुक्त सचिव प्रिसिल्ला मुर्मू के जारी आदेश के अनुसार, विभागीय जांच पदाधिकारी की राय से सहमत होते हुए यह फैसला लिया गया. बिना प्राक्कलन के काम करने, निगरानी नहीं करने, विभागीय आदेशों को नजरअंदाज करने और ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के आरोप सही साबित होने पर झारखंड पेंशन नियमावली के नियम 43ख के तहत रामाशीष राम की पेंशन से अगले 10 साल तक 15 प्रतिशत राशि काटने का दंड दिया गया है.

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