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PTR में कैटल वॉचर के पारिश्रमिक राशि भुगतान में गड़बड़ी, मजदूरों की राशि दूसरे खातों में भेजी

Latehar : पीटीआर दक्षिणी वन प्रमंडल के बारेसांढ़ रेंज में कैटल वॉचर के पारिश्रमिक राशि भुगतान में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. खारवा नाला सिल्विकल्चर और कुसमाही बांस रोपण में कार्यरत वास्तविक मजदूर बजरंगी यादव और रामबिहारी सिंह के बदले लल्लू यादव और देवधारी सिंह के नाम से हाजिरी व एडवाइस तैयार कर राशि दूसरे खातों में भेज दी गई.
 
  • प्रभारी वनपाल ने UPI से 85 हजार रुपये वापस लिये

Latehar : पीटीआर दक्षिणी वन प्रमंडल के बारेसांढ़ रेंज में कैटल वॉचर के पारिश्रमिक राशि भुगतान में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. खारवा नाला सिल्विकल्चर और कुसमाही बांस रोपण में कार्यरत वास्तविक मजदूर बजरंगी यादव और रामबिहारी सिंह के बदले लल्लू यादव और देवधारी सिंह के नाम से हाजिरी व एडवाइस तैयार कर राशि दूसरे खातों में भेज दी गई. 

 

यह राशि बीसी-8 में कार्यरत एक ट्रैकर और उसकी पत्नी के खाते में भेजे जाने की बात सामने आई है. वहीं, निवर्तमान प्रभारी वनपाल निर्भय सिंह द्वारा 17 फरवरी 2025 को फोन-पे के माध्यम से 85 हजार रुपए वापस ले लिया गया है. उक्त यूपीआई से जुड़ा बैंक खाता उनकी पत्नी सोनी कुमारी सिंह का बताया जा रहा है. मजदूरों की हाजिरी, भुगतान रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच में ऐसे कई घोटाले सामने आ सकती है.

 

क्या है पूरा मामला

खारवा नाला सिल्विकल्चर और कुसमाही बांस रोपण में बजरंगी यादव और रामबिहारी सिंह कैटल वॉचर के रूप में कार्यरत थे. बजरंगी यादव को जुलाई 2025 और रामबिहारी सिंह को अगस्त 2025 के बाद काम करने से मना कर दिया गया. इसके बाद दोनों मजदूर अपने बकाया पारिश्रमिक भुगतान के लिए लगातार विभाग का चक्कर लगाते रहे.

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लंबे समय तक भुगतान नहीं मिलने पर दोनों निवर्तमान रेंजर नंद कुमार महतो के पास पहुंचे. वहां जानकारी मिली कि संबंधित महीनों का मानदेय उनके नाम पर नहीं, बल्कि लालू यादव और देवधारी सिंह के नाम से भुगतान दिखाया गया है. इसके बाद लालू यादव के खाते की जांच कराई गई तो उसमें राशि नहीं पहुंचने की बात सामने आई.

 

बाद में लालू यादव और देवधारी सिंह के नाम पर दर्ज भुगतान वाले बैंक खातों की जांच की गई तो पता चला कि जिन खातों में राशि भेजी गई थी, वे खाते उनके नहीं थे. राशि बीसी-8 में कार्यरत ट्रैकर गार्ड और उनकी पत्नी के खाते में भेजी गई थी.

 

ट्रैकर गार्ड ने बताया कि उनके खाते में राशि आई थी, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी. बाद में वनपाल निर्भय सिंह ने उक्त राशि को अपना बताया. इसके बाद 17 फरवरी 2025 को फोन-पे के माध्यम से 85 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए, जबकि शेष राशि नकद लेने की बात सामने आई है. जिस यूपीआई आईडी पर राशि भेजी गई, वह निर्भय सिंह की पत्नी के बैंक खाते से जुड़ी हुई है. पूरे मामले पर निवर्तमान वनपाल निर्भय सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया.

 

लालू और देवधारी ने कहा-

देवधारी सिंह ने बताया कि उन्होंने न तो वन विभाग में कोई काम किया है और न ही उनके बैंक खाते में कोई राशि आई है. वहीं, लालू यादव ने कहा कि ट्रैकर अरुण यादव उनके पास आया था और खाते में 1.17 लाख रुपए आने की बात कहकर राशि मांगने लगा.

 

जब उन्होंने अपने बैंक खाते की जांच कराई तो उसमें कोई राशि नहीं आई थी. दोनों ने संबंधित योजना में काम नहीं करने की बात कही. लालू ने बताया कि उनके नाम का गलत तरीके से उपयोग कर किसी और के खाते में राशि डालकर निकाल लिया गया है.

 

डीएफओ ने कहा-

डीएफओ कुमार आशीष ने कहा कि वास्तविक मजदूरों की ओर से अभी तक लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है. आवेदन मिलने के बाद पूरे मामले की जांच कराई जाएगी. जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

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