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झारखंड के सड़क निर्माण में बोनस भुगतान का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

Ranchi: छत्तीसगढ़ की कंपनी और राज्य सरकार के बीच बोनस भुगतान के मुद्दे पर उभरा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. समय से पहले काम पूरा करने पर सरकार ने पहले बोनस स्वीकृत किया, लेकिन भुगतान नहीं किया. हाईकोर्ट ने ठेकेदार को बोनस भुगतान का आदेश दिया. राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौदी है. मामला पोकला रेलवे स्टेशन से खुमारी तक सड़क निर्माण से संबंधित है.
 

Ranchi: छत्तीसगढ़ की कंपनी और राज्य सरकार के बीच बोनस भुगतान के मुद्दे पर उभरा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. समय से पहले काम पूरा करने पर सरकार ने पहले बोनस स्वीकृत किया, लेकिन भुगतान नहीं किया. हाईकोर्ट ने ठेकेदार को बोनस भुगतान का आदेश दिया. राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौदी है. मामला पोकला रेलवे स्टेशन से खुमारी तक सड़क निर्माण से संबंधित है.


पथ निर्माण विभाग ने पोकला रेलवे स्टेशन से खुमारी तक (21.95 किलोमीटर) सड़क के चौड़ीकरण और मजबूती करण का टेंडर 2018 में निकाला था. इसकी लागत 49.16 करोड़ रुपये निर्धारित की गयी थी. छत्तीसगढ़ की कंपनी मेसर्स विनोद जैन को यह काम मिला था. सड़क निर्माण का काम पूरा करने लिए फरवरी 2020 तक निर्धारित था.


कंपनी ने निर्धारित समय से पहले सितंबर 2019 में काम पूरा कर दिया. विभाग ने उसे काम पूरा करने का सर्टिफिकेट भी दिया. लेकिन टेंडर की शर्तों के मद्देनजर समय से पहले काम पूरा करने के लिए कंपनी को बोनस का भुगतान नहीं किया. कंपनी द्वारा काफी कोशिश के बाद पथ निर्माण विभाग ने नवंबर 2022 में छह प्रतिशत की दर से 2.08 करोड़ रुपये बोनस स्वीकृत किया. लेकिन भुगतान नहीं किया.


स्वीकृति के बावजूद बोनस राशि नहीं मिलने की वजह से कंपनी ने राज्य सरकार, पथ निर्माण सहित विभाग के इंजीनियरों को प्रतिवादी बनाते हुए याचिका दायर की. भुगतान की मांग को लेकर दायर दोनों याचिकाओं में सरकार की ओर से बोनस की स्वीकृति की जानकारी कोर्ट को दी गयी. बाद में सरकार ने बोनस राशि का भुगतान करने के बदले मेसर्स विनोद जैन को पत्र लिखकर यह सूचित किया कि वह बोनस राशि का हकदार नहीं है. क्योंकि उसने टेंडर की शर्तों के अनुरूप काम पूरा नहीं किया है.


इसके बाद कंपनी ने हाईकोर्ट में तीसरी याचिका दायर की. इसकी सुनवाई न्यायाधीश रंगोन मुखोपाध्याय और न्यायाधीश दीपक रौशन की पीठ में हुई. न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिससे कंपनी को टेंडर शर्तों के अनुरूप काम नहीं करने पर बोनस देने से इनकार कर दिया था. न्यायालय ने समय से पहले काम पूरा करने के मामले में 12 प्रतिशत सूद के साथ बोनस राशि के भुगतान का आदेश दिया. राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

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