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समाचार लिखने या दिखाने में दूसरा पक्ष भी लेना पत्रकारिता में जरूरी- अनुराग सक्सेना

  • पत्रकारों पर लगातार दर्ज हो रहे रंगदारी के मुकदमे को लेकर जर्नलिस्ट कांउसिल ऑफ इंडिया ने जतायी चिंता
  • बोले- राष्ट्रीय अध्यक्ष, जल्द केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री को पत्र भेजा जाएगा
Ranchi: पत्रकारों पर लगातार हो रहे फर्जी रंगदारी के मुकदमों को लेकर जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने गहरी चिंता जतायी है. काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग सक्सेना ने कहा, यह एक गंभीर मामला है. मुकदमा होने से पहले पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए. उसके बाद ही इसपर आगे की कोई कार्यवाही होनी चाहिए. देश के वरिष्ठ पत्रकारों संग रविवार को हुए एक वर्चुअल मीटिंग में अनुराग सक्सेना ने कहा, किसी भी समाचार को दिखाने या लिखने से पहले दूसरा पक्ष लेना पत्रकारिता में जरूरी होता है. नहीं तो समाचार की विश्वसनीयता पर ही प्रश्न चिन्ह लग जाता है. उन्होंने कहा, जल्द ही संगठन की ओर से केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री को एक पत्र भेजा जाएगा.

आज तक पत्रकारों पर किसी तरह का कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ : रिटायर्ड जस्टिस विकास कुमार

असम हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस विकास कुमार ने कहा, आज तक पत्रकारों पर जितने भी मुकदमें हुए हैं, उनमें से किसी का भी दोष सिद्ध नहीं हुआ. साफ है कि पत्रकारों पर फर्जी मुकदमे दर्ज हो रहे हैं. यह पत्रकारों को बदनाम करने की साजिश ही लगती है. इसे भी पढ़ें-जर्मनी">https://lagatar.in/germany-became-world-cup-hockey-champion-defeating-defending-champion-belgium/">जर्मनी

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तीनों स्तंभ के जाने-अनजाने कार्य को देख बढ़ जाती है पत्रकारिता की अनिवार्यता : डॉ. आरसी श्रीवास्ताव

वरिष्ठ पत्रकार डॉ.आरसी श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभ (कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका) में जाने-अनजाने कोई ऐसा कार्य हो, जिससे लोगों के अंदर असुरक्षा की भावना पैदा हो, तो उस समय पत्रकारिता की अनिवार्यता और बढ़ जाती है. उन्होंने कहा, आज पत्रकारों पर रंगदारी के जो भी मुकदमे दर्ज हो रहे हैं, उसमें अधिकतर फर्जी है. इससे पत्रकारों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं.

फर्जी मुकदमों को रोकने के लिए कारगर कानून की जरूरत: अशोक कुमार झा

झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार झा ने कहा, आज पत्रकारिता अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती है. पत्रकार का नैतिक कर्तव्य है कि वे सच को दिखाएं. हालंकि ऐसा करने पर इनके ऊपर दबाव बनाया जाता है. उन्होंने कहा, फर्जी मुकदमों को रोकने के लिए कारगर कानून की जरूरत है.

तथाकथित पत्रकार सच्चे पत्रकार की छवि को धूमिल कर रहे: राजूचारण

राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार राजूचारण ने चिंता जताते हुए कहा, पत्रकारिता से जिनका कहीं कोई लेना देना नहीं, उन्हें थोड़े से पैसों के लालच में माइक-आईडी के साथ आई-कार्ड थमा दिया जाता है. ऐसे ही तथाकथित पत्रकार अपनी कमाई के चक्कर में लोगों को ब्लैक मेल करते हैं. यही वजह है कि अब लोगों का भरोसा पत्रकारों पर से भरोसा उठने उठने लगा है. ऐसे ही लोग सच्चे पत्रकारों की छवि को धूमिल कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें-ग्रामीणों">https://lagatar.in/mla-amba-met-with-the-villagers-from-dc-sp-said-injustice-is-happening-with-the-villagers-anger-is-growing/">ग्रामीणों

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रंगदारी के सबसे ज्यादा दंश पत्रकारों को ही झेलना पड़ रहा: संजय जैन

वरिष्ठ पत्रकार संजय जैन ने पूछा कि आखिर क्यों आज देश में रंगदारी से संदर्भित सबसे ज्यादा दंश पत्रकारों को झेलना पड़ रहा है. उन्होंने लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए इस पर उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता पर बल दिया. वरिष्ठ पत्रकार डॉ.ए.के राय ने कहा, आज पत्रकारों पर असामाजिक तत्वों द्वारा कई तरह के झूठे-बेबुनियाद लगाए जा रहे हैं. शासन-प्रशासन को चाहिए कि पत्रकारों से संबंधित किसी भी घटना की अधिकारिक जांच कराएं. हरियाणा से वरिष्ठ पत्रकार लोकेश दत्त मेहता ने भी पत्रकारों पर दर्ज रंगदारी के मुकदमों से पहले आधिकारिक जांच की मांग का समर्थन किया. [wpse_comments_template]

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