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इटली ने ट्रंप को आंख दिखाई! अमेरिकी विमानों को सिगोनेला एयरबेस पर उतरने की इजाजत नहीं देने की खबर

सूत्रों के अनुसार इटली की जॉर्जिया मेलोनी सरकार द्वारा अमेरिकी विमानों को अपने बेस पर उतरने की इजाजत नहीं दी गयी.इटली के अखबार Corriere della Sera की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी बमवर्षकों को सिसिली के पूर्वी हिस्से में स्थित सिगोनेला एयरबेस बेस पर उतरना था. यहां से उन्हें मिडिल ईस्ट जाना था.
 

Washington :   इजरायल-ईरान युद्ध में अमेरिका का कूदना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यूरोपीय सहयोगियों(नाटो देश) को पच नही रहा है. नाटो देश एक-एक कर अमेरिका को आंखें दिखा रहे हैं.

 

खबर आयी है किआज मंगलवार को नाटो सहयोगी इटली ने ट्रंप प्रशासन को झटका देते हुए अमेरिकी सेना के विमानों को सिसिली स्थित सिगोनेला एयरबेस पर उतरने की इजाजत देने से मना कर दिया है. बता दें कि इससे पहले स्पेन ने कहा था कि हमला करने जा रहे किसी भी अमेरिकी फाइटर जेट को स्पेन के ऊपर से जाने नहीं दिया जायेगा.

 

सोमवार को स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोबल्स ने कहा था कि स्पेन में उनअमेरिकी विमानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद रहेगा, जो ईरान पर किये जाने वाले हमलों में शामिल हैं.  अब इटली की बात करें तो उसके सिसली स्थित सिगोनेला एयर बेस पर ठहरने के बाद अमेरिकी सैन्य विमान  मिडिल ईस्ट की तरफ उड़ान भरने वाले थे.

 

सूत्रों के अनुसार इटली की जॉर्जिया मेलोनी सरकार द्वारा अमेरिकी विमानों को अपने बेस पर उतरने की इजाजत नहीं दी गयी.इटली के अखबार Corriere della Sera की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी बमवर्षकों को सिसिली के पूर्वी हिस्से में स्थित सिगोनेला एयरबेस बेस पर उतरना था. यहां से उन्हें मिडिल ईस्ट जाना था.

 

हालांकि अखबार ने यह जानकारी नहीं दी कि अमेरिकी बॉम्बर्स वहां कब उतरने वाले थे. हालांकि इटली के अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अनुमति इसलिए नहीं दी गयी क्योंकि अमेरिका ने इसके लिए औपचारिक अनुरोध नहीं किया था.

 

रिपोर्ट  के अनुसार इटली की जॉर्जिया मेलोनी सरकार ने कहा है कि अमेरिका ने उसके सैन्य नेतृत्व से परामर्श नहीं किया. कहा कि इटली में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल को लेकर संधियों के तहत परामर्श जरूरी है

 

एक खबर और है कि वामपंथी विपक्षी दलों ने जॉर्जिया सरकार से आग्रह किया है कि वह ट्रंप सरकार को इटली में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को इस्तेमाल नहीं करने दे. इससे देश ईरान संघर्ष में शामिल होने से बच जायेगा.

 

हालांकि प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की दक्षिणपंथी सरकार का कहना है कि अगर अमेरिका की तरफ से इस तरह का कोई अनुरोध आता  है, तो उस पर संसद से मंजूरी ली जायेगी. 

 

 
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