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सदन में जगत माझी ने उठाया पलायन का मुद्दा, प्रवासी मजदूरों के शव लाने का खर्च सरकार उठाए की मांग

Ranchi: झारखंड विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान विधायक जगत माझी ने श्रम नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग और उद्योग विभाग की प्रस्तावित मांगों के पक्ष में बोलते हुए राज्य में पलायन और रोजगार से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि पलायन झारखंड के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है और इस पर सख्त नीति बनाने की जरूरत है.
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Ranchi: झारखंड विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान विधायक जगत माझी ने श्रम नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग और उद्योग विभाग की प्रस्तावित मांगों के पक्ष में बोलते हुए राज्य में पलायन और रोजगार से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि पलायन झारखंड के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है और इस पर सख्त नीति बनाने की जरूरत है.

 

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सदन में बोलते हुए जगत माझी ने कहा कि एक तरफ राज्य के मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेशों में पलायन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय रियल स्टेट और शहरी विकास के कार्यों में बंगाल और बिहार जैसे राज्यों से मजदूर लाकर काम कराया जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब झारखंड में ही मजदूर उपलब्ध हैं तो उन्हें काम क्यों नहीं दिया जा रहा है.

 

 

 

उन्होंने कहा कि कई कंपनियां खर्च कम करने और मजदूरों को संगठित होने से रोकने के लिए बाहरी मजदूरों को प्राथमिकता देती हैं. इसे उन्होंने एक तरह का बिजनेस मॉडल बताया, जिससे स्थानीय मजदूरों को नुकसान हो रहा है.

 

रोजगार के मुद्दे पर बोलते हुए जगत माझी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि 2014 में हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन इसके विपरीत रेलवे जैसे बड़े संस्थानों में ग्रुप डी की नौकरियों को आउटसोर्सिंग के जरिए भर दिया गया है. इससे स्थानीय युवाओं के लिए सीधे रोजगार के अवसर कम हो गए हैं.

 

उन्होंने कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय प्रवासी मजदूरों ने भारी कठिनाइयों का सामना किया था, लेकिन आज भी पलायन की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि बाहर काम करने वाले कई मजदूर बेहद खराब परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं, जहां एक छोटे कमरे में 40 से 50 लोग रहते हैं.

 

जगत माझी ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके परिवारों की मदद के लिए एक महत्वपूर्ण मांग भी रखी. उन्होंने कहा कि यदि बाहर काम के दौरान किसी मजदूर की मृत्यु हो जाती है, तो उसके पार्थिव शरीर को घर लाने में करीब एक लाख रुपये तक का खर्च आता है. उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों में सरकार को पूरा खर्च वहन करना चाहिए, ताकि गरीब परिवारों को इस दुख की घड़ी में आर्थिक बोझ न उठाना पड़े.

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