Vaibhav/Devendra
Ranchi: झारखंड राज्यसभा चुनाव का मैदान सज चुका है. दो सीटें हैं, तीन उम्मीदवार हैं और जीत-हार का गणित भी लगभग सबके सामने है. लेकिन इस पूरे चुनाव में एक वोट ऐसा है, जिसने सियासी गलियारों में उत्सुकता बढ़ा दी है. यह वोट है डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता जयराम महतो का.
Lagatar से बातचीत में जयराम महतो ने साफ संकेत दिया कि उनके लिए यह चुनाव सिर्फ एक सीट भरने का मामला नहीं है. उनके शब्दों में झारखंड की पहचान, राज्य आंदोलन की भावना और यहां की मिट्टी की खुशबू भी जुड़ी हुई है.
जयराम महतो ने कहा कि झारखंड अलग राज्य लंबे संघर्ष के बाद बना है. इसलिए राज्य के प्रतिनिधित्व पर चर्चा होना स्वाभाविक है. उन्होंने मूलवासी और आदिवासी समाज की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया. हालांकि उन्होंने किसी उम्मीदवार का नाम नहीं लिया, पर किसी का नाम ना लेते हुए उन्होंने कहा की दोनों दलों के नेता स्थानीय झारखंडी नहीं है.
उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. सवाल उठ रहा है कि आखिर जयराम महतो का वोट किसे मिलेगा. क्या उनका फैसला राजनीतिक समीकरणों के आधार पर होगा या फिर झारखंडी पहचान के सवाल पर?
फिलहाल जयराम महतो ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. उन्होंने किसी उम्मीदवार के समर्थन की घोषणा नहीं की है. लेकिन इतना जरूर है कि उनके बयान ने राज्यसभा चुनाव की चर्चा को सिर्फ संख्या बल तक सीमित नहीं रहने दिया.
मतदान की घड़ी करीब है, लेकिन जयराम महतो के पत्ते अब भी बंद हैं. ऐसे में राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों से ज्यादा चर्चा उस एक वोट की हो रही है, जो आखिरी वक्त तक सस्पेंस बनाए हुए है.
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