New Delhi : विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने ईरानी जहाज आइरिस डेना (IRIS Dena) को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो हमला कर डुबाये जाने को लेकर भारत की स्थिति साफ की है.
विदेश मंत्री नयी दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 में बोल रहे थे. कहा कि बदकिस्मती से जहाज को नहीं बचाया जा सका. अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा, भारत UNCLOS (संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि) और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करता है.
#WATCH | Raisina Dialogue 2026 | EAM Dr S Jaishankar says, "I too support UNCLOS and international law... We got a message from the Iranian side that one of the ships, which presumably was closest to our borders at that point of time, wanted to come into our port. They were… pic.twitter.com/CujBWJkXIL
— ANI (@ANI) March 7, 2026
इस क्रम में कहा, मानवीय आधार पर ईरान के जहाज को शरण देने का फैसला सही था. वे एक अन्य जहाज IRIS लवण की बात कर रहे थे.साथ ही विदेश मंत्री ने हिंद महासागर की भू-राजनीतिक जटिलताओं के संदर्भ में भारत की जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया.
बता दें कि अमेरिकी हमले में श्रीलंका के तट पर ईरानी नौसैनिक जहाज आईआरआईएस देना के डूबने से कुछ दिन पहले, तेहरान द्वारा तकनीकी समस्याओं के कारण तत्काल सहायता मांगने के बाद भारत ने ईरानी जहाज IRIS लवण को कोच्चि में खड़ा करने की अनुमति दी थी.
जयशंकर ने कहा, ईरान के अनुरोध पर एक मार्च को भारत द्वारा अनुमति दिये जाने के बाद जहाज कोच्चि में डॉक हो गया. इस जहाज पर कई युवा कैडेट सवार थे.
उन्होंने साफ किया जब जहाज यहां से रवाना हुए थे(युद्ध छिड़ चुका था) और जब वो यहां पहुंचे, तब स्थिति बिल्कुल अलग थी. विदेश मंत्री भारतीय नौसेना द्वारा 16 फरवरी से 25 फरवरी तक विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू कार्यक्रम की बात कर रहे थे.
सोशल मीडिया पर जारी बहसों के संदर्भ में विदेश मंत्री ने हिंद महासागर की भू-राजनीतिक हकीकत को समझने की सलाह दी. याद दिलाया कि डिएगो गार्सिया पिछले पांच दशकों से हिंद महासागर में मौजूद है. जयशंकर ने साफ कहा कि भारत क्षेत्र की जटिलताओं को समझते हुए अपनी जिम्मेदारियां निभा रहा है.
याद करें कि 4 मार्च को श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर गाले के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिका पनडुब्बी ने टॉरपीडो फायर कर ईरानी फ्रिगेट आईआरआईआईएस डेना को डुबा दिया था.
इस हमले में 87 नाविक मारे गये थे. बता दें कि ईरानी जहाज आईआरआईआईएस डेना विशाखापत्तनम में नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के बाद लौट रहा था.
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