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जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री से की बात, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर चर्चा

Lagatar Desk :  मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और गैस आपूर्ति पर मंडराते खतरे के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है. इसी क्रम में भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की. दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय हालात और ताजा घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा हुई.

 

 

जहाजों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा

ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस बातचीत की जानकारी दी. मंत्रालय के मुताबिक, दोनों विदेश मंत्रियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी चर्चा की. बातचीत के दौरान अमेरिका और इजरायल की सैन्य गतिविधियों के संभावित प्रभावों को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ.

 

 

जहाजों की असुरक्षा और समस्याओं के लिए अमेरिका जिम्मेदार

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने फारस की खाड़ी में जहाजों की सुरक्षा को लेकर अपने देश के सैद्धांतिक रुख का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जहाजों के लिए पैदा हो रही असुरक्षा और समस्याएं अमेरिका की आक्रामक और अस्थिर करने वाली नीतियों का परिणाम हैं. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस स्थिति के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराने की बात भी कही.

 

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जयशंकर ने संपर्क में रहने की कही बात

वहीं विदेश मंत्री जयशंकर ने भी अपने एक्स हैंडल पर इस बातचीत की जानकारी साझा की. उन्होंने लिखा कि अराघची के साथ मौजूदा संघर्ष से जुड़े ताजा घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा हुई और दोनों पक्षों ने आगे भी संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई.

 

 

गौरतलब है कि जयशंकर और अराघची के बीच यह पहली बातचीत नहीं है. इससे पहले भी 28 फरवरी और 5 मार्च को दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय हालात को लेकर बातचीत हो चुकी है.

 

 

 

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