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सुप्रीम कोर्ट ने UCC लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया, गेंद सरकार के पाले में डाली

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुधारों की प्रक्रिया के संदर्भ में हमें ध्यान रखना होगा कि किसी समुदाय को उन अधिकारों से वंचित न कर दिया जाये जो उन्हें वर्तमान में दिये जा रहे हैं. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि UCC लागू करने का अधिकार संसद के विवेक पर निर्भर है.
 

New Delhi :  सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार को शरीयत कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया. 

 

इस क्रम में SC ने कहा कि इस विषय पर संसद विचार करे. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर महादेवन की बैंच ने  मामले को गंभीर करार देते हुए कहा कि यदि अदालत सीधे शरीयत कानून को खत्म कर देती है, तो इससे एक कानूनी शून्य पैदा हो जायेगा.

 

SC ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में मुस्लिम विरासत को नियंत्रित करने के लिए कोई वैकल्पिक कानून मौजूद नहीं रहेगा सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग को सकारात्मक कहते हुए गेंद सरकार के (विधायिका) के पाले में डाल दी.

 

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुधारों की प्रक्रिया के संदर्भ में हमें ध्यान रखना होगा कि किसी समुदाय को उन अधिकारों से वंचित न कर दिया जाये जो उन्हें वर्तमान में दिये जा रहे हैं.  जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि UCC लागू करने का अधिकार संसद के विवेक पर निर्भर है.  

 

जस्टिस बागची के अनुसार एक पुरुष के लिए एक पत्नी का नियम वर्तमान में सभी समुदायों पर समान रूप से लागू नहीं है.  इसका अर्थ यह नहीं कि कोर्ट सभी दूसरी शादियों को असंवैधानिक घोषित कर दे.कहा कि हमें Directive प्रिंसिपल्स को प्रभावी बनाने के लिए विधायी शक्ति पर निर्भर रहना होगा. 


 
जान लें कि याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि मुस्लिम महिलाओं को भी विरासत के मामले में पुरुषों के बराबर अधिकार होने चाहिए. अहम बात यह रही कि  कोर्ट ने स्वीकार किया कि उसने पहले भी उसने कई बार संसद को समान नागरिक संहिता लागू करने की सिफारिश की है. क्योंकि अंतिम निर्णय संसद को ही लेना है।

   

   

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