राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के लिए केंद्र के साथ होने वाले एमओयू (MoU) का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. इस ड्राफ्ट को विधि और वित्त विभाग की मंजूरी मिलने के बाद कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा. कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही केंद्र सरकार के साथ समझौता होगा और इसके बाद 6500 करोड़ की राशि जारी होने का रास्ता साफ हो जाएगा.
अधूरी योजनाएं होंगी पूरी
झारखंड में नल-जल योजना के तहत कुल 97,535 योजनाएं संचालित हैं. इनमें से 56,386 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि करीब 40% योजनाएं अभी भी अधूरी हैं. केंद्रांश की कमी के कारण इन योजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई है. सरकार का कहना है कि राशि मिलने के बाद सभी अधूरी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा, ताकि हर घर तक नल से जल पहुंचाया जा सके.
केंद्रांश में भारी कमी
योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 50-50 प्रतिशत है. केंद्र से अब तक 24,665 करोड़ स्वीकृत हैं, लेकिन इसके मुकाबले सिर्फ 5,987 करोड़ ही प्राप्त हुए हैं. वहीं राज्य सरकार ने 6,874 करोड़ योजना मद में खर्च किए हैं.
झारखंड को वित्तीय वर्ष 2024-25 में केंद्र से 2,114 करोड़ मिलने थे. लेकिन केवल 70 करोड़ ही मिले थे. जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक केंद्र से एक भी राशि नहीं मिली है. इस कारण करीब 6500 करोड़ अभी भी लंबित है और कई योजनाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं.
ठेकेदारों की हालत गंभीर
भुगतान नहीं होने से छोटे ठेकेदारों की स्थिति बेहद खराब हो गई है. मार्च 2024 से भुगतान बंद है, जिससे कई संवेदक आर्थिक संकट में हैं और दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए हैं. बावजूद इसके, कई छोटे ठेकेदार अपने संसाधनों से गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था बनाए रखे हुए हैं.
सरकार गंभीर, जल्द समाधान की उम्मीद
राज्य सरकार ने केंद्र से लंबित राशि के मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल जीवन मिशन 2.0 के लिए तेजी से प्रक्रिया आगे बढ़ाई है. विभाग में वर्तमान समय में पदास्थापित अधिकारियों ने एमओयू और राशि निर्गत करने के लिए काफी मेहनत और मशक्त करनी पड़ी है. एमओयू होते ही फंड जारी होने की उम्मीद है, जिससे राज्य में जलापूर्ति योजनाओं को नई रफ्तार मिलेगी.
जल जीवन मिशन 2.0 : एमओयू की शर्तें तय, राज्य को पहले देना होगा अपना अंशदान
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केंद्र सरकार के साथ होने वाले एमओयू में अहम शर्तें तय की गई हैं. नई शर्तों के अनुसार, योजना की राशि प्राप्त करने से पहले राज्य सरकार को अपना अंशदान देना अनिवार्य होगा. इसके अनुरूप ही केंद्र सरकार अपनी राशि जारी करेगी.
योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए दोनों सरकारों की साझेदारी 50:50 के अनुपात में लागू रहेगी. केंद्र सरकार की ओर से लगभग 6013.60 करोड़ जारी किए जाने का प्रावधान है. वहीं, योजना को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को 7608.98 करोड़ का अंशदान देना होगा.
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