- 1.91 करोड़ की कथित धोखाधड़ी को लेकर जमशेदपुर के सोनारी थाना में दर्ज थी प्राथमिकी
- कोर्ट ने कहा- विवाद मूलतः दीवानी प्रकृति का है
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने एक व्यावसायिक लेन-देन से संबंधित मामले में याचिकाकर्ताओं विमल कुमार अग्रवाल एवं प्रतीक अग्रवाल को राहत दी है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की याचिका को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर और उससे उत्पन्न समस्त आपराधिक कार्रवाई रद्द कर दी.
आरोप था कि याचिकाकर्ता विमल कुमार अग्रवाल और उनके पुत्र प्रतीक अग्रवाल ने रेलवे टेंडर व्यवसाय में निवेश कराने के नाम पर शिकायतकर्ता से 1.91 करोड़ लिए थे. शिकायतकर्ता का आरोप था कि लाभ के साथ राशि लौटाने का वादा किया गया था, लेकिन बाद में पैसा वापस नहीं किया गया.
मामले में पुलिस ने जांच के बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी) एवं 34 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था और मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लिया था. मामले को लेकर जमशेदपुर के सोनारी थाना में कांड संख्या 45 /2025 दर्ज किया गया था.
मामले में कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ताओं पर किसी "सौंपी गई संपत्ति" के गबन का आरोप भी नहीं था. विवाद मूलतः दीवानी प्रकृति का है. कोर्ट ने यह भी माना कि यह अधिकतम एक देनदार-लेनदार (debtor-creditor) संबंध का मामला है. ऐसे विवाद को आपराधिक मुकदमे का रूप देकर प्रतिशोध का माध्यम नहीं बनाया जा सकता.
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