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Jamshedpur: श्रम अधीक्षक पर गिरी विभागीय कार्यवाही की गाज, दोषी मिलने पर अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा

Jamshedpur : सोमवार को सेवानिवृत्त हुए जमशेदपुर-2 के तत्कालीन श्रम अधीक्षक सत्येंद्र सिंह के खिलाफ पहले से चल रही विभागीय जांच में उन्हें दोषी पाए जाने के बाद अब उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा कर दी गई है. श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग ने राजभवन के निर्देश के आलोक में आदेश जारी करते हुए मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.
 

Jamshedpur : सोमवार को सेवानिवृत्त हुए जमशेदपुर-2 के तत्कालीन श्रम अधीक्षक सत्येंद्र सिंह के खिलाफ पहले से चल रही विभागीय जांच में उन्हें दोषी पाए जाने के बाद अब उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा कर दी गई है. श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग ने लोकभवन के निर्देश के आलोक में आदेश जारी करते हुए मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.

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विभागीय आदेश के अनुसार सत्येंद्र सिंह पर सरकारी कार्यों में लापरवाही, स्वेच्छाचारिता, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड को राजस्व का नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. विभागीय जांच में इन आरोपों की पुष्टि होने के बाद अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है.


जांच रिपोर्ट के मुताबिक 12 अगस्त 2025 से 14 जनवरी 2026 के बीच उन्होंने 41 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया था. आरोप है कि इनमें से केवल दो प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किया गया, जबकि सिर्फ एक मामले में उपकर वसूली की कार्रवाई की गई. शेष 38 मामलों में आवश्यक कार्रवाई नहीं किए जाने से बोर्ड को राजस्व का नुकसान हुआ.


यह मामला 16 जनवरी 2026 को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सामने आया था. इसके बाद विभाग ने उनसे एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन निर्धारित समय पर जवाब नहीं मिलने पर रिमाइंडर भेजा गया. विभाग का कहना है कि इसके बावजूद संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ.


आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सत्येंद्र सिंह लगभग 26 वर्ष 5 माह तक श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के रूप में कार्य कर चुके थे और जुलाई 2025 में पदोन्नत होकर श्रम अधीक्षक बने थे. वहीं, सत्येंद्र सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है. उनका कहना है कि कार्यालय के कुछ लोग उन्हें जानबूझकर फंसाने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कार्यभार अधिक होने के कारण कुछ रिपोर्ट समय पर जमा नहीं हो सकीं. यदि विभाग उनसे विस्तृत स्पष्टीकरण मांगेगा तो वह तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखेंगे.

 

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