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जमशेदपुर केवल औद्योगिक नगर नहीं, बल्कि दूरदर्शी सोच और सामाजिक दायित्व की मिसाल : राज्यपाल

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने गुरुवार को आरवीएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित 6वें IEEE अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन – ICRTCST-26 में शामिल हुए. यहां उन्होंने कहा कि लौहनगरी जमशेदपुर केवल एक औद्योगिक नगर ही नहीं है
 

Jamshedpur: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने गुरुवार को आरवीएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित 6वें IEEE अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन – ICRTCST-26 में शामिल हुए. यहां उन्होंने कहा कि लौहनगरी जमशेदपुर केवल एक औद्योगिक नगर ही नहीं है, बल्कि दूरदर्शी औद्योगिक सोच, नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्व की मिसाल के रूप में देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है.

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राज्यपाल ने कहा कि इस गौरवशाली परंपरा की नींव टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी नुसरवानजी टाटा ने रखी थी, जिन्होंने उद्योग को केवल लाभ का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा का सशक्त साधन माना. शिक्षा, अनुसंधान, तकनीक और मानव कल्याण के क्षेत्र में टाटा समूह का योगदान आज भी प्रेरणास्रोत है.


उन्होंने कहा कि झारखंड अपनी प्राकृतिक और खनिज संपदा, सांस्कृतिक विविधता और युवा प्रतिभा के लिए जाना जाता है. आज के दौर में, जब विश्व तीव्र तकनीकी परिवर्तन से गुजर रहा है, तब विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार किसी भी राज्य और राष्ट्र के सतत एवं समावेशी विकास की मजबूत आधारशिला हैं.


उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सूचना प्रौद्योगिकी (IT), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्मार्ट सिस्टम्स, साइबर-फिजिकल सिस्टम्स और उभरती डिजिटल तकनीकें न केवल वर्तमान की आवश्यकता हैं, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय कर रही हैं. ये तकनीकें उद्योग, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, स्मार्ट गवर्नेंस और सामाजिक विकास को नई गति दे रही हैं. राज्यपाल ने कहा कि IEEE जैसे प्रतिष्ठित संगठनों द्वारा आयोजित सम्मेलन ज्ञान के आदान-प्रदान के साथ-साथ वैश्विक चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान विकसित करने में भी सहायक होते हैं.

 


राज्यपाल ने शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि अब उनकी जिम्मेदारी केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक समाधान के केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए. उन्होंने युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी तकनीकी दक्षता का उपयोग समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में करें, क्योंकि अनुसंधान तभी सार्थक होता है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे.

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