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Jamshedpur News: 77 साल बाद भी नदी-पहाड़ संरक्षण कानून नहीं, सम्मेलन में ठोस पहल की मांग

Jamshedpur: साकची स्थित मोती लाल नेहरू पब्लिक स्कूल में शुक्रवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन की शुरुआत हुई. सम्मेलन का आयोजन तरुण भारत संघ, IIT-ISM धनबाद, युगांतर भारती, नेचर फाउंडेशन, स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट, जल बिरादरी और मिशनY के संयुक्त तत्वावधान में शुरू हुआ. सम्मेलन में देशभर से पर्यावरणविद, विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र शामिल हुए.

 

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नदियों और पहाड़ों के संरक्षण, संवर्द्धन और सुरक्षा के लिए अलग और मजबूत कानून बनाने की दिशा में चर्चा करना है. सम्मेलन में  मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और जलपुरुष के नाम से प्रसिद्ध राजेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 77 वर्षों में कई पर्यावरण कानून बनाए गए, लेकिन नदियों और पहाड़ों की रक्षा के लिए प्रभावी कानून नहीं बन सका. उन्होंने कहा कि आज प्रकृति का दोहन नहीं बल्कि खुला शोषण हो रहा है और इसकी कोई सीमा तय नहीं है.

 

राजेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान केवल इंसानों ही नहीं बल्कि पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की सुरक्षा की भी बात करता है. उन्होंने कहा कि अरावली समेत कई पहाड़ लगातार काटे जा रहे हैं और नदियां तेजी से प्रदूषित हो रही हैं. उन्होंने अथर्ववेद का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों साल पहले भी प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया था. उन्होंने लोगों से प्रकृति बचाने के लिए आगे आने की अपील की.

 

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वी. गोपाला गौड़ा ने कहा कि आजादी के 77 साल बाद भी देश में नदियों और पहाड़ों के लिए अलग कानून नहीं बन पाया. उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इस दिशा में पहल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर नदी और पर्वत संरक्षण कानून बनाया जाना चाहिए.

 

जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि स्वर्णरेखा समेत कई नदियों की हालत लगातार खराब होती जा रही है. उन्होंने कहा कि पहले लोग नदियों के पानी पर निर्भर थे, लेकिन अब प्रदूषण के कारण स्थिति गंभीर हो गई है. उन्होंने बताया कि नदी और पहाड़ संरक्षण को लेकर कानून का एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जिसमें विशेषज्ञों के सुझाव शामिल किए जाएंगे.

 

पर्यावरणविद दिनेश मिश्र ने कहा कि नदियां मां के समान हैं और उन्हें केवल संसाधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि नदियों के साथ लगातार छेड़छाड़ के कारण पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है. जल बिरादरी के राष्ट्रीय संयोजक बोलिशेट्टी सत्यनारायणा ने कहा कि अगर पहाड़ खत्म हो गए तो बारिश और जल स्रोत भी समाप्त हो जाएंगे. उन्होंने युवाओं से प्रकृति संरक्षण आंदोलन में आगे आने की अपील की.

 

आईआईटी आईएसएम धनबाद के मिशनY के संयोजक प्रोफेसर अंशुमाली ने कहा कि दामोदर नदी की लंबाई में भारी कमी आई है, जो चिंता का विषय है. सम्मेलन के तकनीकी सत्र में कई विशेषज्ञों ने कहा कि मौजूदा पर्यावरण कानूनों का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है और निगरानी संस्थाएं भी कमजोर साबित हो रही हैं. वक्ताओं ने नदियों और पहाड़ों की सुरक्षा के लिए सख्त और प्रभावी कानून की आवश्यकता पर जोर दिया.

 

सम्मेलन में 300 से अधिक डेलीगेट्स शामिल हुए, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं. कार्यक्रम के दौरान खरकई नदी पर लिखी गई पुस्तक का विमोचन भी किया गया. सम्मेलन का दूसरा और अंतिम दिन 23 मई को आयोजित होगा.

 

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