Jamshedpur : डिमना स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए स्वीकृत होमगार्ड पदों को भरना विभाग के लिए चुनौती बनता जा रहा है. अस्पताल में 90 और मेडिकल कॉलेज में 45 जवानों के पद स्वीकृत हैं. यानी दोनों जगह कुल 135 जवानों की तैनाती का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान में स्वीकृत संख्या के मुताबिक बल उपलब्ध नहीं है.
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश के बाद जवानों की तैनाती को लेकर रोटेशन व्यवस्था लागू की गई है. चार महीने का कमान पूरा करने वाले जवानों को हटाकर उनकी जगह दूसरे जवानों को भेजा जा रहा है. अब तक करीब दो दर्जन जवानों का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें एमजीएम से हटाकर डीवीसी, बैंक समेत अन्य सरकारी संस्थानों में ड्यूटी दी जा चुकी है.
अस्पताल की ड्यूटी से क्यों बच रहे हैं जवान
एमजीएम में तैनात होमगार्ड जवानों के सामने सबसे बड़ी चिंता विवाद की स्थिति को लेकर है. अस्पताल में मरीजों के साथ बड़ी संख्या में उनके परिजन भी आते हैं, जिससे कई बार कर्मचारियों, परिजनों और सुरक्षा कर्मियों के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है.
जवानों के बीच यह धारणा है कि ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षा के लिए सख्ती करने पर शिकायत का सामना करना पड़ सकता है. वहीं, हस्तक्षेप नहीं करने पर ड्यूटी में लापरवाही का आरोप लगने की आशंका रहती है. इसी वजह से कुछ जवान अपेक्षाकृत शांत सरकारी संस्थानों में तैनाती को प्राथमिकता दे रहे हैं.
एक अगस्त की घटना के बाद बढ़ी चिंता
एक अगस्त को एमजीएम अस्पताल में हुए विवाद ने भी होमगार्ड जवानों के बीच इस चिंता को बढ़ाया. घटना के दौरान जवानों के साथ कथित दुर्व्यवहार और वर्दी फाड़े जाने की बात सामने आई थी. दो युवकों की पिटाई का मामला बाद में राजनीतिक विवाद में भी बदल गया.
भाजपा नेता गुंजन यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने अस्पताल पहुंचकर प्रदर्शन किया था और संबंधित जवानों पर कार्रवाई की मांग की थी. घटना के बाद कुछ जवानों को अस्पताल से हटाए जाने की चर्चा भी हुई. इससे ड्यूटी कर रहे जवानों के बीच विवाद की स्थिति में कार्रवाई की आशंका को लेकर चिंता बढ़ी.
अस्पताल में 84 जवान, छह पद अब भी खाली
अस्पताल में 90 स्वीकृत पदों के मुकाबले फिलहाल करीब 84 होमगार्ड जवान ड्यूटी कर रहे हैं. छह पद खाली हैं. विभाग रोटेशन के जरिए इन पदों को भरने की प्रक्रिया में है, लेकिन पर्याप्त संख्या में जवान उपलब्ध नहीं होने के कारण सभी पदों पर तैनाती करना आसान नहीं हो रहा है.
विभागीय स्तर पर जवानों की उपलब्धता और आवश्यकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है. दूसरी ओर, कई जवान बैंक, डीवीसी और अन्य सरकारी संस्थानों में ड्यूटी को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां विवाद की संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जाती है.
मेडिकल कॉलेज में भी स्वीकृत संख्या पूरी नहीं
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के लिए भी 45 होमगार्ड जवानों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां भी पूरी संख्या में तैनाती नहीं हो पाई है. कॉलेज में सुरक्षा को लेकर एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम 23 जुलाई की रात सामने आया था, जब दो जूनियर डॉक्टरों की डिमना लेक में डूबने से मौत हुई थी.
घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद होमगार्ड जवानों से भी पूछताछ की गई थी. इसके बाद कॉलेज में तैनात सुरक्षा कर्मियों के बीच अपनी जिम्मेदारी और संभावित कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ने की बात सामने आई.
बढ़ते मरीजों के बीच सुरक्षा बल की जरूरत
एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की लगातार आवाजाही को देखते हुए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है. ऐसे में स्वीकृत पदों के मुकाबले जवानों की कमी और कुछ जवानों की एमजीएम में ड्यूटी को लेकर अनिच्छा विभाग के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर रही है.
एक तरफ खाली पदों को भरना जरूरी है, तो दूसरी ओर रोटेशन व्यवस्था के तहत अनुभवी और नए जवानों के बीच संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है. अस्पताल की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए आने वाले समय में पर्याप्त सुरक्षा बल की उपलब्धता और जवानों के भरोसे को बनाए रखना अहम होगा.
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