शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना के तहत 21 पंचायतों के 113 गांवों, रेलवे क्षेत्र की 33 बस्तियों और लगभग 2.5 लाख लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन पाइपलाइन बिछने के बावजूद अब तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है.
इसी मुद्दे को लेकर बागबेड़ा जलापूर्ति योजना आंदोलन से जुड़े लोगों ने योजना स्थल का निरीक्षण किया और वहां चल रहे कार्यों का जायजा लिया. निरीक्षण के बाद आंदोलनकारियों ने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखकर ऐसा नहीं लगता कि योजना निकट भविष्य में पूरी हो पाएगी. उनका आरोप है कि काम की रफ्तार बेहद धीमी है और लोगों को सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र के हजारों परिवार लंबे समय से पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं. खासकर गर्मी के मौसम में हालात और गंभीर हो जाते हैं, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
निरीक्षण के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की. बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि यदि जल्द जलापूर्ति शुरू नहीं की गई तो क्षेत्र की जनता के हित में व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा. आंदोलनकारियों ने कहा कि स्वच्छ पेयजल लोगों का बुनियादी अधिकार है और इसे सुनिश्चित कराने के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा.
इस दौरान कई सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे. सभी ने सरकार और संबंधित विभाग से योजना को जल्द पूरा कर नियमित जलापूर्ति शुरू करने की मांग की और कहा कि जनता की आवाज को और मजबूती से उठाया जाएगा.
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